भारत में 1 जुलाई 2024 से लागू हुई Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 ने पुराने IPC को प्रतिस्थापित किया है। इसमें आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) से संबंधित प्रावधान Section 351 के अंतर्गत दिए गए हैं। विशेष रूप से Section 351(3) BNS in Hindi गंभीर प्रकार की धमकियों से संबंधित है।
Section 351(3) BNS
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कानून का नाम | Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 |
| धारा | Section 351(3) BNS |
| पुराना समकक्ष (IPC) | धारा 506 IPC (Criminal Intimidation) |
| लागू हुई | 1 जुलाई 2024 |
| अपराध की श्रेणी | Cognizable / Non-bailable (गंभीर मामलों में) |
| अधिकतम सज़ा | 7 साल कारावास + जुर्माना |
| क्षेत्राधिकार | पूरे भारत में लागू |
| संबंधित धाराएँ | BNS 351(1), 351(2), 352 |
| मूल उद्देश्य | गंभीर आपराधिक धमकी से नागरिकों की सुरक्षा |
BNS आया कहाँ से? — थोड़ा Background समझते हैं

पहले था IPC — Indian Penal Code, 1860। जी हाँ, वही जो अंग्रेज़ों के ज़माने में Thomas Babington Macaulay ने लिखी थी। लगभग 163 साल पुरानी यह संहिता बहुत हद तक अपना समय पूरा कर चुकी थी।
2023 में भारत सरकार ने तीन नए कानून लाए:
- Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) — IPC की जगह
- Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) — CrPC की जगह
- Bharatiya Sakshya Adhiniyam (BSA) — Indian Evidence Act की जगह
Expert Insight 💡: वरिष्ठ अधिवक्ता और संवैधानिक विशेषज्ञ बताते हैं कि BNS में भाषा को ज़्यादा स्पष्ट बनाया गया है और कई धाराओं को पुनर्गठित किया गया है। पुराने IPC की धारा 503 (Criminal Intimidation की परिभाषा) और धारा 506 (इसकी सज़ा) — अब BNS में धारा 351 के विभिन्न उपखंडों में समाहित हो गई हैं।
Section 351 BNS in Hindi — पूरी धारा को समझें पहले
351 BNS in Hindi में धारा 351 को तीन उपखंडों में बाँटा गया है:
351(1) BNS — Criminal Intimidation की परिभाषा
यह उपधारा बताती है कि आपराधिक धमकी (criminal intimidation) क्या होती है।
सरल भाषा में: जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को — या उसके किसी प्रिय व्यक्ति की संपत्ति या प्रतिष्ठा को — नुकसान पहुँचाने की धमकी देता है, और यह धमकी उस व्यक्ति को डराने के लिए, या उसे कोई काम करने पर मजबूर करने के लिए, या किसी काम से रोकने के लिए दी जाती है — तो यह आपराधिक धमकी कहलाती है।
उदाहरण: “अगर तूने मेरे खिलाफ गवाही दी, तो मैं तेरे बच्चे को देख लूँगा।” — यह 351(3) BNS in Hindi के अंतर्गत गंभीर धमकी है।
351(2) BNS — साधारण धमकी की सज़ा
जब धमकी देना साबित हो जाए, लेकिन वह उतनी गंभीर नहीं हो — तो SEC 351(3) BNS in Hindi के बजाय धारा 351(2) लागू होती है।
सज़ा: 2 साल तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों।
351(3) BNS in Hindi — यही है असली मुद्दा!
यह उपधारा तब लागू होती है जब धमकी और भी गंभीर हो। विशेष रूप से जब:
- मृत्यु या गंभीर चोट की धमकी दी गई हो
- आग लगाने या संपत्ति नष्ट करने की धमकी हो
- ऐसी धमकी जो 7 साल या उससे अधिक सज़ा वाले अपराध से संबंधित हो
- महिला की मान-हानि (imputation of unchastity) की धमकी हो
सज़ा: 7 साल तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों।
यह Section 351(3) BNS in Hindi का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान है — और यही IPC की पुरानी धारा 506 (दूसरा भाग) का नया अवतार है।
351(3) BNS in Hindi को Real Life में कैसे पहचानें?

आइए कुछ ऐसे उदाहरण देखें जिनसे 351(3)bns in Hindi एकदम क्रिस्टल क्लियर हो जाए:
केस 1: पड़ोसी का विवाद
रामलाल और श्यामलाल के बीच ज़मीन का विवाद था। श्यामलाल ने गुस्से में कहा, “अगर तूने कोर्ट में केस किया, तो मैं तेरे घर में आग लगा दूँगा।”
धारा: 351(3) BNS — क्योंकि संपत्ति जलाने की धमकी दी गई। सज़ा: 7 साल तक।
केस 2: साइबर धमकी
किसी ने WhatsApp पर मैसेज किया, “अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी, तो मैं तुम्हारी झूठी तस्वीरें वायरल कर दूँगा।”
धारा: SEC 351(3) BNS in Hindi + साइबर कानून भी लागू हो सकते हैं। सज़ा: 7 साल तक + IT Act की धाराएँ अलग।
केस 3: सामान्य झगड़ा
“एक थप्पड़ मारूँगा तुझे!” — यह गुस्से में कही बात अगर सिर्फ़ धमकी तक सीमित रही।
धारा: 351(2) BNS — क्योंकि यह गंभीर चोट या मृत्यु की धमकी नहीं है। सज़ा: 2 साल तक।
Expert Insight 💡: दिल्ली हाईकोर्ट के एक फ़ैसले में कहा गया था कि धमकी का डर “reasonable person” की नज़र से आँका जाना चाहिए — न कि सिर्फ़ पीड़ित की व्यक्तिगत संवेदनशीलता के आधार पर। यानी अदालत देखेगी कि क्या सामान्य समझदार व्यक्ति भी उस धमकी को गंभीर मानता।
351(3) BNS in Hindi in IPC — पुराने और नए कानून की तुलना
बहुत से लोग Google पर खोजते हैं — 351(3) BNS in Hindi in IPC — यानी इसका IPC से क्या संबंध है। आइए एक comparison table से समझते हैं:
| पहलू | IPC धारा 506 (पुरानी) | 351(3) BNS in Hindi (नई) |
|---|---|---|
| कानून | Indian Penal Code, 1860 | Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 |
| लागू से | 1862 | 1 जुलाई 2024 |
| साधारण धमकी की सज़ा | 2 साल | 2 साल (धारा 351(2)) |
| गंभीर धमकी की सज़ा | 7 साल | 7 साल (धारा 351(3)) |
| भाषा | अंग्रेज़ी केंद्रित, जटिल | अपेक्षाकृत स्पष्ट |
| महिला संबंधी प्रावधान | था | विशेष उल्लेख और भी स्पष्ट |
| Digital/Cyber threats | Explicitly नहीं | व्याख्या में शामिल |
महत्वपूर्ण बात: 1 जुलाई 2024 से पहले के मामलों में अभी भी IPC लागू होगी। उसके बाद के मामलों में BNS। तो अगर किसी पर पुरानी FIR है IPC 506 के तहत, वो मामला IPC के तहत ही चलेगा।
351 BNS in Hindi — FIR कैसे दर्ज करें?
अगर आपको 351 BNS in Hindi के तहत कोई धमकी मिली है, तो घबराएँ नहीं। यह करें:
Step 1: सबूत इकट्ठा करें
- WhatsApp/SMS screenshots लें
- Call recording (जहाँ कानूनी हो)
- गवाहों के नाम नोट करें
- वीडियो/ऑडियो क्लिप सुरक्षित करें
Step 2: नज़दीकी पुलिस स्टेशन जाएँ
- लिखित शिकायत दें
- FIR दर्ज करने का अधिकार माँगें (यह आपका कानूनी अधिकार है)
Step 3: Magistrate के पास जाएँ (अगर पुलिस न सुने)
- BNSS की धारा 175 के तहत सीधे Magistrate के पास भी शिकायत दे सकते हैं
Step 4: वकील से सलाह लें
- Section 351(3) BNS in Hindi के मामले cognizable हो सकते हैं (यानी पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है)
351(3) BNS in Hindi — Cognizable है या Non-Cognizable?
यह सवाल बहुत ज़रूरी है और अक्सर confuse करता है।
351(1) और 351(2) BNS: Non-Cognizable (पुलिस सीधे FIR नहीं करती, पहले Magistrate की अनुमति चाहिए।)
351(3) BNS: Cognizable और Non-Bailable — यानी गंभीर मामलों में पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है और ज़मानत भी आसान नहीं होती।
यही कारण है कि 351(3) BNS in Hindi इतनी महत्वपूर्ण धारा है।
महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान — 351(3) BNS in Hindi
Section 351(3) BNS in Hindi में एक विशेष और बेहद ज़रूरी प्रावधान है — जब किसी महिला को उसकी शील या चरित्र पर आरोप लगाने की धमकी दी जाए (imputation of chastity), तो यह भी धारा 351(3) के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा।
यानी अगर कोई किसी महिला को कहे — “अगर तूने मेरी बात नहीं मानी, तो मैं तेरे बारे में झूठी बातें फैला दूँगा/फोटो वायरल करूँगा” — तो 351(3)bns in Hindi के साथ POCSO, IT Act, और अन्य कानून भी लागू हो सकते हैं।
यह प्रावधान महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मज़बूत कदम है।
बचाव के तरीके — अगर आप पर धारा 351(3) BNS लगाई गई हो
अब दूसरा पहलू भी समझें — कभी-कभी झूठे मामले भी दर्ज हो जाते हैं। अगर आप पर 351(3) BNS का झूठा आरोप लगा है, तो:
1. Bail Application: Session Court में ज़मानत के लिए आवेदन करें। अच्छे वकील की सहायता लें।
2. Anticipatory Bail: अगर गिरफ़्तारी का डर हो, तो High Court में अग्रिम ज़मानत (Section 482 BNSS) के लिए आवेदन करें।
3. Quashing of FIR: अगर FIR दुर्भावनापूर्ण हो, तो High Court में Section 528 BNSS के तहत FIR रद्द करने की याचिका दायर कर सकते हैं।
4. Alibi और साक्ष्य: जहाँ थे, वहाँ का सबूत — CCTV footage, travel records, गवाह — सब इकट्ठा करें।
Expert Insight 💡: सुप्रीम कोर्ट ने कई बार दोहराया है कि criminal intimidation के मामलों में सिर्फ़ धमकी का होना काफ़ी नहीं — यह भी ज़रूरी है कि पीड़ित को वाकई डर लगा हो और वह “alarm” की स्थिति में रहा हो। तो बचाव पक्ष इस एंगल से भी लड़ सकता है।
351(3) BNS vs अन्य संबंधित धाराएँ
SEC 351(3) BNS in Hindi अकेले नहीं आती — अक्सर इसके साथ और धाराएँ भी जुड़ती हैं:
| धारा | विषय | संबंध |
|---|---|---|
| BNS 351(1) | Criminal Intimidation की परिभाषा | आधार धारा |
| BNS 351(2) | सामान्य धमकी — 2 साल | हल्के मामले |
| BNS 351(3) | गंभीर धमकी — 7 साल | मुख्य विषय |
| BNS 352 | Assault (हमला) | Physical intimidation |
| BNS 115 | Abetment | उकसाना |
| IT Act 66A (पुरानी) / Section 67 | Cyber threats | Online धमकी |
| BNS 74 | Assault on woman | महिला से संबंधित |
क्या सिर्फ़ मौखिक धमकी पर भी 351(3) BNS लगेगी?
बिल्कुल हाँ। और यही बात लोग नहीं जानते।
351(3) BNS in Hindi के लिए यह ज़रूरी नहीं कि धमकी लिखित हो। मौखिक धमकी, gesture से दी गई धमकी, या किसी तीसरे व्यक्ति के ज़रिए भेजी गई धमकी — सब इस धारा के दायरे में आ सकती हैं।
बस ये तीन चीज़ें साबित होनी चाहिए:
- धमकी दी गई थी (Threat existed)
- धमकी का मकसद था — डराना, मजबूर करना या रोकना (Intent)
- धमकी इतनी गंभीर थी कि 351(3) के दायरे में आए (Gravity)
Digital India में 351(3) BNS — साइबर धमकियाँ
2024 के बाद का भारत पूरी तरह डिजिटल है। और इसीलिए Section 351(3) BNS in Hindi आज और भी relevant हो गई है।
WhatsApp, Instagram, Twitter/X, Facebook — इन सब पर दी गई धमकियाँ भी अब इस दायरे में हैं।
Cyber Intimidation के नए रूप:
- Voice notes में धमकी
- Stories/Status पर indirect threat
- Group में publicly डराना
- Private messages में death threats
- Deepfake या morphed images की धमकी
Expert Insight 💡: Cyber Law विशेषज्ञ कहते हैं कि digital evidence की life बहुत कम होती है। Screenshot लें, cloud backup करें, और तुरंत शिकायत दर्ज करें।
Conclusion: कानून जानना = खुद को सुरक्षित रखना
तो दोस्तों, अब आप जान गए कि 351(3) BNS in Hindi कोई जटिल rocket science नहीं — बस एक ज़रूरी कानूनी हथियार है जो हर नागरिक के हाथ में है।
इसकी मुख्य बातें याद रखें:
- यह गंभीर धमकियों पर लागू होती है — मृत्यु, चोट, आगजनी, या महिला की प्रतिष्ठा पर आरोप
- 351(3) BNS की सज़ा 7 साल तक है
- यह Cognizable और Non-Bailable है
- Digital threats भी इसमें शामिल हैं
- 351(3) BNS in Hindi in IPC का पुराना रूप IPC 506 था
- महिलाओं के लिए इसमें विशेष सुरक्षा है
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. 351(3) BNS in Hindi में सज़ा कितनी है?
उत्तर: Section 351(3) BNS के तहत अधिकतम 7 साल कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह तब लागू होती है जब धमकी मृत्यु, गंभीर चोट, संपत्ति को आग/नाश की हो, या किसी महिला की चरित्र हनन की धमकी हो।
Q2. 351(3) BNS in Hindi in IPC की पुरानी धारा क्या थी?
उत्तर: 351(3) BNS in Hindi in IPC का पुराना संस्करण IPC की धारा 506 (दूसरा भाग) था। 1 जुलाई 2024 से IPC की जगह BNS लागू है और अब यही धारा 351(3) कहलाती है।
Q3. क्या WhatsApp पर भेजी धमकी पर 351(3) BNS लगती है?
उत्तर: हाँ। 351(3)bns in Hindi के तहत डिजिटल/cyber धमकियाँ भी शामिल हैं। Screenshot और digital evidence सबूत के तौर पर मान्य हैं।
Q4. 351(3) BNS Cognizable है या नहीं?
उत्तर: SEC 351(3) BNS in Hindi Cognizable और Non-Bailable है। यानी गंभीर मामलों में पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है।
Q5. क्या झूठी FIR पर बचाव हो सकता है?
उत्तर: हाँ। 351 BNS in Hindi के झूठे मामलों में अग्रिम ज़मानत, FIR quashing और अच्छे कानूनी बचाव के ज़रिए राहत मिल सकती है। तुरंत वकील से सलाह लें।
Q6. क्या सिर्फ़ एक गवाह काफ़ी है 351(3) BNS साबित करने के लिए?
उत्तर: भारतीय साक्ष्य कानून में “गवाहों की संख्या” से ज़्यादा “गवाही की विश्वसनीयता” मायने रखती है। एक भरोसेमंद गवाह + digital evidence मिलाकर मज़बूत case बन सकता है।
Q7. 351 BNS in Hindi और 352 BNS में क्या फ़र्क है?
उत्तर: 351 BNS criminal intimidation (धमकी) से जुड़ी है, जबकि 352 BNS assault (हमला/बल प्रयोग) से। अगर सिर्फ़ धमकी दी गई — 351। अगर physical action हुआ — 352 भी जुड़ेगी।
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