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    Home - IPC - 406 IPC In Hindi: धारा 406 क्या है, सजा, जमानत और BNS में बदलाव
    IPC

    406 IPC In Hindi: धारा 406 क्या है, सजा, जमानत और BNS में बदलाव

    ShivBy ShivSeptember 9, 2026
    406 Ipc In Hindi

    406 IPC in Hindi का मतलब है आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) — जब कोई व्यक्ति किसी की संपत्ति अपने पास रखकर उसे धोखा देता है, तो उस पर यह धारा लगती है।

    Table of Contents

    Toggle
    • Quick Stats Table: धारा 406 IPC एक नज़र में
    • 406 IPC In Hindi — धारा 406 का पूरा मतलब
      • धारा 405 बनाम धारा 406 — फ़र्क क्या है?
    • Section 406 IPC In Hindi — कब लगती है यह धारा?
      • आम उदाहरण जहाँ धारा 406 लगती है:
    • 406 IPC In Hindi Punishment — क्या सजा मिलती है?
      • सजा का पूरा विवरण:
    • 406 IPC In Hindi Bailable Or Not — जमानत होती है या नहीं?
      • Bailable बनाम Non-Bailable अंतर:
    • 406 IPC In Hindi Jamanat — जमानत कैसे मिलती है?
      • जमानत की प्रक्रिया (Step by Step):
      • जमानत मिलने में क्या-क्या देखा जाता है?
      • 406 IPC In Hindi Jamanat के लिए ज़रूरी दस्तावेज़:
    • 406 IPC Compoundable Or Not — समझौता हो सकता है?
      • Compoundable का मतलब:
      • समझौते की शर्तें:
    • Dhara 406 IPC In Hindi — FIR कैसे दर्ज करें?
      • FIR दर्ज करने की प्रक्रिया:
      • FIR के लिए ज़रूरी सबूत:
    • 406 IPC In Hindi In BNS — नए कानून में क्या बदला?
      • BNS में धारा 406 का नया रूप:
      • क्या सज़ा बदली?
      • BNS के तहत नई बातें:
    • 406 IPC में बचाव के उपाय — आरोपी क्या कर सकता है?
      • Defense Strategies (बचाव के तरीके):
      • Quashing (FIR रद्द) कब हो सकती है:
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • Read More:
    • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
      • Q1. 406 IPC In Hindi में FIR कहाँ करें?
      • Q2. 406 IPC में Bail कितने दिन में मिलती है?
      • Q3. क्या 406 IPC में Anticipatory Bail मिलती है?
      • Q4. BNS में 406 IPC की जगह कौन सी धारा है?
      • Q5. क्या तलाक के मामले में 406 लग सकती है?
      • Q6. 406 IPC में कितना जुर्माना होता है?
      • Q7. 406 IPC Compoundable है — इसका क्या फायदा है?

    Quick Stats Table: धारा 406 IPC एक नज़र में

    विवरण जानकारी
    धारा का नाम Criminal Breach of Trust (आपराधिक विश्वासघात)
    IPC Section 406
    BNS (2023) में समकक्ष धारा 316(3)
    अपराध की श्रेणी Non-cognizable / Cognizable (परिस्थिति अनुसार)
    जमानत (Bail) Bailable (जमानती)
    Compoundable हाँ – पीड़ित की अनुमति से
    सजा (Punishment) 3 साल तक की कैद, जुर्माना, या दोनों
    किस कोर्ट में चलेगा Magistrate Court (JMFC)
    परिसीमा काल 3 साल (Limitation Period)

    406 IPC In Hindi — धारा 406 का पूरा मतलब

    406 IPC in Hindi में “Criminal Breach of Trust” को “आपराधिक विश्वासघात” कहते हैं। यह तब होता है जब कोई व्यक्ति:

    • किसी दूसरे की संपत्ति (Property) अपने पास रखता है
    • उस संपत्ति पर उसे “Trust” (विश्वास) के साथ कब्ज़ा दिया गया हो
    • और वह व्यक्ति उस संपत्ति को बेईमानी से अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर ले या वापस न करे

    धारा 405 बनाम धारा 406 — फ़र्क क्या है?

    बिंदु धारा 405 धारा 406
    प्रकार परिभाषा (Definition) सजा का प्रावधान (Punishment)
    विषय Criminal Breach of Trust क्या है इसकी सजा क्या है
    उपयोग कानूनी परिभाषा के लिए FIR और कोर्ट केस के लिए
    संबंध 406 का आधार है 405 पर आधारित है

    धारा 405 Criminal Breach of Trust को define करती है, और धारा 406 IPC उसकी सज़ा बताती है। दोनों मिलकर एक पूरा कानूनी ढांचा बनाते हैं।

    Section 406 IPC In Hindi — कब लगती है यह धारा?

    Section 406 IPC In Hindi तब लागू होती है जब इन तीनों शर्तों का पूरा होना ज़रूरी है:

    पहली शर्त — Entrustment (सौंपना): संपत्ति आरोपी को किसी ख़ास मकसद के लिए सौंपी गई हो। जैसे — पैसे निवेश के लिए, सामान बेचने के लिए, या किसी काम के लिए।

    दूसरी शर्त — Misappropriation (गलत इस्तेमाल): आरोपी ने उस संपत्ति को अपने फायदे के लिए या किसी गैरकानूनी काम में लगाया।

    तीसरी शर्त — Dishonest Intent (बेईमानी की नीयत): आरोपी की नीयत शुरू से या बाद में बेईमान रही हो।

    आम उदाहरण जहाँ धारा 406 लगती है:

    उदाहरण क्या हुआ धारा 406 लागू?
    Broker ने पैसे हड़पे Investment के लिए दिए पैसे वापस नहीं किए हाँ
    साझेदार ने धोखा दिया Business में partner ने सारा पैसा निकाल लिया हाँ
    नौकर ने सामान चुराया घर का सामान रखने दिया, उसने बेच दिया हाँ
    किराएदार ने deposit रखी Deposit वापस नहीं की कभी-कभी
    Employer ने salary रोकी काम किया पर पैसे नहीं मिले हाँ
    रिश्तेदार ने ज़मीन हड़पी देखभाल के लिए ज़मीन दी, उसने बेच दी हाँ
    पड़ोसी ने उधार लिया पैसे उधार लिए पर वापस नहीं किए नहीं  (यह Civil मामला है)

    406 IPC In Hindi Punishment — क्या सजा मिलती है?

    406 IPC in Hindi Punishment के बारे में IPC की धारा 406 में साफ लिखा है:

    “जो कोई भी Criminal Breach of Trust करेगा, उसे 3 साल तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।”

    सजा का पूरा विवरण:

    सजा का प्रकार विवरण
    अधिकतम कारावास 3 साल (3 Years Imprisonment)
    न्यूनतम कारावास कानून में तय नहीं (Judge तय करता है)
    जुर्माना Judge के विवेक पर (No fixed amount)
    दोनों एक साथ हाँ, संभव है
    सज़ा देने वाला Magistrate (JMFC)

    406 IPC In Hindi Bailable Or Not — जमानत होती है या नहीं?

    यह सबसे ज़रूरी सवाल है जो हर व्यक्ति पूछता है। तो जवाब है —

    हाँ! 406 IPC in Hindi Bailable Or Not के जवाब में यह Bailable (जमानती) अपराध है।

    इसका मतलब:

    • आरोपी को arrest के बाद Police Station से ही जमानत मिल सकती है
    • Court जाने की ज़रूरत नहीं (हालांकि जा सकते हैं)
    • Magistrate Court से आसानी से bail मिलती है

    Bailable बनाम Non-Bailable अंतर:

    पहलू Bailable (जैसे 406) Non-Bailable
    जमानत कहाँ से Police Station या Court सिर्फ Court
    कितनी आसानी से अपेक्षाकृत आसान मुश्किल
    Judge का अधिकार Bail देना ज़रूरी है Judge तय करता है
    उदाहरण धारा 406, 420 (कुछ मामले) धारा 302, 376

    406 IPC In Hindi Jamanat — जमानत कैसे मिलती है?

    406 IPC In Hindi Jamanat मिलना अपेक्षाकृत आसान है क्योंकि यह Bailable offense है। लेकिन प्रक्रिया जाननी ज़रूरी है।

    जमानत की प्रक्रिया (Step by Step):

    चरण क्या करें
    1 Arrest होने पर Police Station में Bail Application दें
    2 Surety (ज़मानतदार) की व्यवस्था करें
    3 Bail Bond भरें
    4 अगर Police Station से न मिले, तो JMFC Court में आवेदन करें
    5 Court में वकील के ज़रिए Regular Bail Application दाखिल करें

    जमानत मिलने में क्या-क्या देखा जाता है?

    कारक विवरण
    आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड पहले कोई केस तो नहीं?
    संपत्ति की राशि कितने का विश्वासघात हुआ?
    भागने का खतरा क्या आरोपी भाग सकता है?
    Surety की स्थिति ज़मानतदार की आर्थिक स्थिति
    जांच में सहयोग Police को सहयोग दे रहा है?

    406 IPC In Hindi Jamanat के लिए ज़रूरी दस्तावेज़:

    • पहचान पत्र (Aadhar, PAN, Passport)
    • निवास प्रमाण
    • Surety का शपथ पत्र और ID
    • वकील की पैरवी (अनुशंसित)

    406 IPC Compoundable Or Not — समझौता हो सकता है?

    406 IPC Compoundable Or Not — यह भी बहुत लोग जानना चाहते हैं।

    जवाब है: हाँ, धारा 406 IPC एक Compoundable Offense है।

    इसका मतलब है कि पीड़ित और आरोपी आपस में समझौता करके मुकदमा खत्म कर सकते हैं।

    Compoundable का मतलब:

    शब्द अर्थ
    Compoundable जिसमें पीड़ित की अनुमति से समझौता हो सके
    Non-Compoundable जिसमें समझौता नहीं हो सकता (जैसे हत्या)
    406 IPC Compoundable — Section 320 CrPC के तहत

    समझौते की शर्तें:

    शर्त विवरण
    पीड़ित की सहमति ज़रूरी है — बिना इसके नहीं होगा
    Court की अनुमति कुछ cases में Court की भी मंज़ूरी चाहिए
    आरोपी की पहल आरोपी को पैसे वापस करने होंगे
    लिखित समझौता Court में दाखिल करना होगा

    Dhara 406 IPC In Hindi — FIR कैसे दर्ज करें?

    Dhara 406 IPC In Hindi के तहत FIR दर्ज करना आपका कानूनी अधिकार है। लेकिन पुलिस अक्सर टालती है क्योंकि यह Non-cognizable offense (कुछ मामलों में) भी हो सकती है।

    FIR दर्ज करने की प्रक्रिया:

    चरण क्या करें
    1 नज़दीकी Police Station जाएँ
    2 लिखित शिकायत दें — घटना का पूरा विवरण
    3 सबूत साथ लाएँ (WhatsApp messages, receipts, agreements)
    4 अगर Police FIR न करे — Magistrate को Section 156(3) CrPC के तहत शिकायत दें
    5 Online FIR का भी विकल्प है (राज्य के Portal पर)

    FIR के लिए ज़रूरी सबूत:

    सबूत का प्रकार उदाहरण
    दस्तावेज़ी सबूत Agreement, Receipt, Cheque
    Digital सबूत WhatsApp chats, Emails, SMS
    गवाह जो लोग transaction के वक्त मौजूद थे
    Financial records Bank statements, Transfer proof

    406 IPC In Hindi In BNS — नए कानून में क्या बदला?

    406 IPC In Hindi In BNS — यह 2026 में बेहद ज़रूरी जानकारी है क्योंकि भारत सरकार ने IPC की जगह Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 लागू कर दी है जो 1 जुलाई 2024 से प्रभावी है।

    BNS में धारा 406 का नया रूप:

    पुराना कानून (IPC) नया कानून (BNS 2023)
    धारा 405 — परिभाषा धारा 316(1) — परिभाषा
    धारा 406 — सामान्य सजा धारा 316(3) — सामान्य सजा
    धारा 407 — Carrier के लिए धारा 316(4) — Carrier के लिए
    धारा 408 — Employee के लिए धारा 316(5) — Employee के लिए
    धारा 409 — Public Servant धारा 316(2) — Public Servant

    क्या सज़ा बदली?

    406 IPC In Hindi In BNS के तहत सज़ा वही रही — 3 साल तक की कैद, जुर्माना, या दोनों। BNS ने कानून की संख्या बदली, मगर Criminal Breach of Trust की परिभाषा और सज़ा में कोई खास बदलाव नहीं किया।

    BNS के तहत नई बातें:

    बदलाव विवरण
    धारा की संख्या 406 → BNS 316(3)
    भाषा थोड़ी आधुनिक और स्पष्ट
    Digital संपत्ति अब Digital Assets भी “संपत्ति” में शामिल
    Online Fraud Cyber-related Breach of Trust cases आसानी से cover होते हैं
    Trial Process BNSS (नई CrPC) के तहत चलेगा

    406 IPC में बचाव के उपाय — आरोपी क्या कर सकता है?

    अगर आप पर 406 IPC लगी है और आप निर्दोष हैं, तो घबराएं नहीं। कानून में बचाव के कई रास्ते हैं।

    Defense Strategies (बचाव के तरीके):

    बचाव का आधार कब काम आता है
    Bona Fide Dispute (ईमानदार विवाद) जब यह Civil matter हो, Criminal नहीं
    No Dishonest Intent जब गलती बेईमानी से नहीं, अनजाने में हुई
    No Entrustment जब कभी कोई trust नहीं बना था
    Limitation अगर FIR 3 साल बाद दर्ज की गई
    Settlement पीड़ित को पैसे वापस करके Compromise
    Discharge Application Trial शुरू होने से पहले बरी होने की अर्जी

    Quashing (FIR रद्द) कब हो सकती है:

    High Court के Section 482 CrPC (या BNS के Section 528 BNSS) के तहत FIR Quash हो सकती है जब:

    शर्त विवरण
    Civil dispute है कोई criminal element नहीं
    पार्टियों में समझौता हो Compounding हो गया
    FIR दुर्भावना से दायर की Malicious Prosecution साबित हो
    Prima Facie case नहीं बनता Facts से 406 की ingredients नहीं निकलतीं

    निष्कर्ष (Conclusion)

    406 IPC in Hindi यानी Criminal Breach of Trust में किसी व्यक्ति को विश्वास के आधार पर सौंपी गई संपत्ति का बेईमानी से इस्तेमाल या उसका दुरुपयोग करना अपराध था। पुराने IPC के तहत इसमें 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान था। यह प्रावधान कारोबार, लेन-देन या निजी संबंधों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जाता था, लेकिन केवल विवाद या पैसा वापस न करने से अपने-आप 406 IPC का अपराध साबित नहीं होता था।

    1 जुलाई 2024 से IPC की जगह BNS लागू है, और Criminal Breach of Trust से संबंधित प्रावधान BNS की धारा 316 में दिए गए हैं। किसी मामले में सबसे महत्वपूर्ण तत्व बेईमान मंशा (Dishonest Intent) और संपत्ति का विश्वास के आधार पर सौंपा जाना है। इसलिए शिकायत दर्ज करने से पहले मामले के तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों को समझना जरूरी है।

    Read More:

    • 366 IPC In Hindi
    • 305 A BNS In Hindi

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. 406 IPC In Hindi में FIR कहाँ करें?

    जवाब: जिस थाने के अंतर्गत घटना हुई, वहाँ FIR करें। अगर Police न लिखे तो CrPC की धारा 156(3) के तहत Magistrate Court में application दें।

    Q2. 406 IPC में Bail कितने दिन में मिलती है?

    जवाब: Bailable offense होने के कारण Arrest के बाद उसी दिन Police Station से bail मिल सकती है। अगर नहीं मिलती तो अगले दिन Magistrate Court से।

    Q3. क्या 406 IPC में Anticipatory Bail मिलती है?

    जवाब: हाँ। Session Court या High Court से Anticipatory Bail (अग्रिम जमानत) मिल सकती है, हालांकि Bailable offense में इसकी ज़रूरत कम पड़ती है।

    Q4. BNS में 406 IPC की जगह कौन सी धारा है?

    जवाब: 406 IPC In Hindi In BNS यानी Bharatiya Nyaya Sanhita में धारा 316(3) ने 406 IPC की जगह ली है। 1 जुलाई 2024 के बाद के मामलों में BNS लागू होगी।

    Q5. क्या तलाक के मामले में 406 लग सकती है?

    जवाब: हाँ। अगर पति या ससुरालवालों ने स्त्रीधन (दहेज का सामान, गहने, नकदी) वापस नहीं किया, तो Dhara 406 IPC लागू हो सकती है।

    Q6. 406 IPC में कितना जुर्माना होता है?

    जवाब: कानून में कोई fixed जुर्माना नहीं है। यह Judge के विवेक पर निर्भर करता है। आमतौर पर जितनी संपत्ति का विश्वासघात हुआ, उसके बराबर या उससे ज़्यादा जुर्माना लगाया जा सकता है।

    Q7. 406 IPC Compoundable है — इसका क्या फायदा है?

    जवाब: Compoundable होने का मतलब है कि दोनों पक्ष आपस में समझौता करके मुकदमा खत्म कर सकते हैं। यह Court के बाहर या Lok Adalat में हो सकता है — जिससे समय और पैसा दोनों बचता है।

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    Shiv

    एक Legal Content Writer हैं, जो भारतीय कानून और कानूनी जागरूकता से जुड़े विषयों पर सरल, सटीक और रिसर्च-आधारित लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक भरोसेमंद कानूनी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

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