Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    THE BNS SECTION
    • Home
    • IPC
      • BNS
    • Crimes & Punishments
    • Law
    • Legal Sections
    • Article
    • Contact Us
    • About US
      • Privacy Policy
      • Terms & Conditions
    THE BNS SECTION
    Home - BNS - 115(2) BNS in Hindi: 7 जरूरी बातें जो आपको 2026 में जरूर जाननी चाहिए
    BNS

    115(2) BNS in Hindi: 7 जरूरी बातें जो आपको 2026 में जरूर जाननी चाहिए

    ShivBy ShivJune 8, 2026
    115(2) BNS in Hindi: 7 जरूरी बातें जो आपको 2026 में जरूर जाननी चाहिए

    एक थप्पड़ और पूरा कानून!

    कल्पना कीजिए — बाजार में आपसे किसी की झड़प हो गई, थोड़ी बहस हुई, और बात हाथापाई तक पहुँच गई। अगली सुबह आपको पता चला कि आप पर FIR दर्ज हो गई है — Section 115(2) BNS के तहत। अब आप सोच रहे हैं — “यह 115 2 BNS in Hindi क्या बला है? मुझे जेल होगी? जमानत मिलेगी? और यह IPC वाले 323 से कैसे अलग है?”

    घबराइए मत! आप बिल्कुल सही जगह आए हैं।

    जब से भारत सरकार ने 163 साल पुराने Indian Penal Code (IPC) को हटाकर Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 लागू किया — 1 जुलाई 2024 से — तब से हर दूसरा नागरिक Google पर यही खोज रहा है कि “115 2 BNS in Hindi” का मतलब क्या है।

    तो आज हम इसे एकदम आसान, मजेदार और तथ्यात्मक तरीके से समझेंगे। कोई भारी-भरकम कानूनी शब्दजाल नहीं — बस सीधी बात, बढ़िया अंदाज में।

    Table of Contents

    Toggle
    • एक थप्पड़ और पूरा कानून!
    • BNS Section 115(2) —
    • BNS Section 115 क्या है? — एकदम आसान भाषा में
      • Section 115(1) BNS कहती है:
      • Section 115(2) BNS — यानी 115 2 BNS in Hindi — वह हिस्सा है जो सजा की बात करता है:
    • IPC Section 323 से BNS 115(2) — क्या बदला?
    • 115(2) BNS — Bailable है या Non-Bailable?
    • “Voluntarily Causing Hurt” का मतलब क्या है? — 3 जरूरी तत्व
      • तत्व 1: इरादा (Intention) या ज्ञान (Knowledge)
      • तत्व 2: कोई शारीरिक कार्य (Physical Act)
      • तत्व 3: वास्तविक चोट (Actual Hurt)
    • धारा 115 BNS — असली जिंदगी के उदाहरण
      • ✅ यह Section 115(2) BNS के अंतर्गत आता है:
      • ❌ यह Section 115(2) BNS के अंतर्गत नहीं आता:
    • Section 122 BNS — “Grave and Sudden Provocation” Exception
    • FIR दर्ज होने के बाद क्या होता है? — Step-by-Step Process
    • 115(2) BNS की सजा — पूरी जानकारी
      • सजा के विकल्प:
    • 115(2) BNS vs IPC — तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Table)
    • किन परिस्थितियों में यह धारा लगती है? — Expert Analysis
    • “Hurt” की परिभाषा — क्या-क्या इसमें शामिल है?
    • अगर आप पर 115(2) BNS लगी है — क्या करें?
    • BNS के बारे में कुछ रोचक तथ्य
    • Tamil, Marathi और अन्य भाषाओं में जानकारी
    • Landmark Case References (Educational Purpose)
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • और पढ़ें:
    • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
      • Q1. 115(2) BNS in Hindi में क्या है?
      • Q2. 115 2 BNS Bailable है या Non-Bailable?
      • Q3. पुराने IPC में 115(2) BNS का equivalent क्या था?
      • Q4. 115(2) BNS में सजा (Saja) कितनी है?
      • Q5. क्या Section 115(2) BNS का मामला कोर्ट से बाहर settle हो सकता है?
      • Q6. Dhara 115 BNS Cognizable है या Non-Cognizable?
      • Q7. अगर कोई जानबूझकर मुझे थप्पड़ मारे, तो क्या Section 115(2) BNS लागू होगा?
      • Q8. Section 115(2) BNS कब से लागू हुआ?
      • Q9. क्या यह धारा सिर्फ हिंदी भाषी राज्यों में लागू है?
      • Q10. Section 115(2) BNS में किस कोर्ट में सुनवाई होती है?

    BNS Section 115(2) —

    विषय विवरण
    धारा का नाम Section 115(2) — Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023
    हिंदी नाम स्वेच्छा से उपहति कारित करना (Voluntarily Causing Hurt)
    पुराना IPC समकक्ष Section 323, IPC 1860
    लागू तिथि 1 जुलाई 2024
    अधिकतम कारावास 1 वर्ष (Either description)
    अधिकतम जुर्माना ₹10,000
    जमानत (Bail) हाँ — जमानतीय (Bailable)
    संज्ञेय (Cognizable)? नहीं — असंज्ञेय (Non-Cognizable)
    समझौता योग्य (Compoundable)? हाँ
    सुनवाई करने वाला न्यायालय कोई भी मजिस्ट्रेट (Any Magistrate)
    Chapter Chapter VI — Offences Affecting the Human Body

    BNS Section 115 क्या है? — एकदम आसान भाषा में

    ठीक है, पहले एक मिनट रुकिए और यह समझिए कि Dhara 115 असल में कहती क्या है।

    Section 115(1) BNS कहती है:

    “जो कोई किसी व्यक्ति को चोट पहुँचाने के इरादे से, या यह जानते हुए कि उससे चोट लगने की संभावना है, कोई कार्य करता है और उससे उस व्यक्ति को चोट लगती है — तो वह ‘स्वेच्छा से उपहति कारित करना’ कहलाता है।”

    सीधे शब्दों में — अगर आपने जानबूझकर किसी को चोट पहुँचाई, चाहे एक हल्की-सी धक्का हो या थप्पड़, तो यह Section 115(1) BNS की परिभाषा में आता है।

    Section 115(2) BNS — यानी 115 2 BNS in Hindi — वह हिस्सा है जो सजा की बात करता है:

    “जो कोई, Section 122(1) में दिए गए मामले को छोड़कर, स्वेच्छा से उपहति कारित करता है, उसे किसी एक प्रकार के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक हो सकती है, या दस हजार रुपए तक के जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।”

    Translation बिल्कुल सरल भाषा में: किसी को जानबूझकर मारो, चोट लगाओ — 1 साल की जेल या ₹10,000 जुर्माना या दोनों।

    IPC Section 323 से BNS 115(2) — क्या बदला?

    अब यहाँ मजे की बात है। बहुत से लोग पूछते हैं — “115 2 BNS in Hindi IPC Section” में क्या फर्क है?

    जवाब बहुत दिलचस्प है। IPC का पुराना Section 323 बिल्कुल इसी अपराध को cover करता था। लेकिन नए कानून ने कुछ बदलाव किए:

    पहलू IPC Section 323 (पुराना) BNS Section 115(2) (नया)
    कारावास 1 वर्ष तक 1 वर्ष तक (समान)
    जुर्माना ₹1,000 तक ₹10,000 तक (10 गुना!)
    Community Service नहीं हाँ — नया विकल्प जोड़ा
    लागू कानून IPC 1860 BNS 2023
    प्रभावी तिथि 30 जून 2024 तक 1 जुलाई 2024 से

    तो देखिए — Section 115 2 BNS in Hindi ने जुर्माना 10 गुना बढ़ा दिया! पहले ₹1,000 थे, अब ₹10,000 हैं। सरकार ने साफ संदेश दिया — “छोटी चोट भी बड़ी सजा का कारण बन सकती है।”

    Expert Insight: वरिष्ठ अधिवक्ता और कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जुर्माने में यह वृद्धि एक महत्वपूर्ण संकेत है कि नया BNS छोटे-छोटे शारीरिक हमलों को भी गंभीरता से लेता है। यह deterrence (निवारण) का एक नया रूप है।

    115(2) BNS — Bailable है या Non-Bailable?

    यह सबसे ज्यादा पूछे जाने वाला सवाल है — “115 2 BNS Bailable or Not”?

    खुशखबरी यह है कि Section 115(2) BNS जमानतीय (Bailable) अपराध है।

    इसका मतलब — अगर आप पर यह धारा लगी है, तो आपको जमानत लेने का अधिकार है। पुलिस आपको जमानत देने से सामान्यतः इनकार नहीं कर सकती।

    जमानत के बारे में जरूरी बातें:

    • Bailable Offence — आप Police Station पर ही जमानत माँग सकते हैं
    • Compoundable Offence — मतलब, पीड़ित और आरोपी कोर्ट की अनुमति से आपसी समझौता कर सकते हैं
    • Non-Cognizable — पुलिस बिना Magistrate की अनुमति के FIR दर्ज नहीं कर सकती (हालांकि कुछ situations में वे करती हैं — इसलिए वकील से जरूर मिलें)

    Anticipatory Bail का सुझाव: कई कानूनी विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि अगर आपको पहले से लगे कि आप पर FIR हो सकती है, तो Anticipatory Bail के लिए आवेदन करें।

    “Voluntarily Causing Hurt” का मतलब क्या है? — 3 जरूरी तत्व

    Section 115 2 BNS in Hindi Punishment लागू होने के लिए 3 चीजें जरूरी हैं:

    तत्व 1: इरादा (Intention) या ज्ञान (Knowledge)

    आरोपी ने या तो जानबूझकर चोट पहुँचाने का इरादा रखा हो, या कम से कम यह जानता हो कि उसका कार्य चोट पहुँचा सकता है।

    उदाहरण: राम ने श्याम को मुक्का मारा — इरादा स्पष्ट है। उदाहरण नहीं: राम की कार अचानक फिसली और श्याम को लग गई — यहाँ इरादा नहीं है।

    तत्व 2: कोई शारीरिक कार्य (Physical Act)

    कोई वास्तविक शारीरिक क्रिया होनी चाहिए — धक्का, थप्पड़, काटना, खरोंचना, आदि।

    तत्व 3: वास्तविक चोट (Actual Hurt)

    BNS Section 2(16) के अनुसार “Hurt” का अर्थ है — शारीरिक दर्द, बीमारी, या कमजोरी। यहाँ कोई minimum threshold नहीं है — यहाँ तक कि एक थप्पड़ भी ‘Hurt’ माना जा सकता है।

    Supreme Court का रुख: सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि खरोंच, चोट के निशान, या अस्थायी दर्द भी ‘Hurt’ की परिभाषा में आते हैं — अगर वे जानबूझकर हों।

    धारा 115 BNS — असली जिंदगी के उदाहरण

    चलिए कुछ scenarios देखते हैं जो BNS 115 2 in Hindi में आते हैं और जो नहीं:

    ✅ यह Section 115(2) BNS के अंतर्गत आता है:

    • पड़ोसी विवाद: A ने B को थप्पड़ मारा — जानबूझकर
    • Road Rage: G ने भीड़ में पत्थर फेंका जो H को लगा — जानबूझकर कार्य
    • झड़प: Office में बहस के बाद एक व्यक्ति ने दूसरे को धक्का दिया

    ❌ यह Section 115(2) BNS के अंतर्गत नहीं आता:

    • Accident: E गलती से F से टकरा गया और F गिर गया — इरादा नहीं था
    • Provocation Exception (Section 122 BNS): M ने N को गाली दी, N ने जवाब में मारा — अगर गंभीर और अचानक उकसावा साबित हो, तो सजा कम हो सकती है

    Section 122 BNS — “Grave and Sudden Provocation” Exception

    Section 115 2 BNS in Hindi पढ़ते समय एक बहुत जरूरी exception याद रखें — Section 122(1) BNS।

    इसके अनुसार, अगर किसी ने आपको इतनी गंभीर और अचानक उकसावट दी कि आपने गुस्से में चोट पहुँचाई — तो आपकी सजा कम हो सकती है।

    लेकिन ध्यान रखें: यह exception बहुत strict conditions के साथ आता है। केवल “वो पहले शुरू किया” कहना काफी नहीं है — कोर्ट में ठोस सबूत और परिस्थितियाँ दिखानी होती हैं।

    यही कारण है कि BNS 115 2 in Hindi समझते समय Section 122 को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    FIR दर्ज होने के बाद क्या होता है? — Step-by-Step Process

    अगर आप पर Section 115 2 BNS के तहत FIR हुई है, तो यह process होती है:

    Step 1: FIR दर्ज (यह Non-Cognizable है, इसलिए Magistrate की अनुमति जरूरी होती है)

    Step 2: Police Investigation (अगर Magistrate ने आदेश दिया)

    Step 3: Charge Sheet दाखिल

    Step 4: Any Magistrate के समक्ष Trial

    Step 5: Settlement का विकल्प — Compoundable होने के कारण दोनों पक्ष कोर्ट की अनुमति से समझौता कर सकते हैं

    Step 6: फैसला — कारावास, जुर्माना, Community Service, या Acquittal

    Important Note: चूँकि यह Compoundable Offence है, Supreme Court के Narinder Singh v. State of Punjab जैसे मामलों में कोर्ट ने FIR Quashing की भी अनुमति दी है अगर दोनों पक्ष सच में सुलह कर लें।

    115(2) BNS की सजा — पूरी जानकारी

    अब सीधे 115 2 BNS in Hindi Punishment पर आते हैं:

    सजा के विकल्प:

    विकल्प 1 — कारावास:

    • अधिकतम 1 वर्ष
    • “Either Description” — मतलब Rigorous (कठोर) या Simple कारावास दोनों में से कोई भी

    विकल्प 2 — जुर्माना (Fine):

    • अधिकतम ₹10,000
    • (पुराने IPC में यह सिर्फ ₹1,000 था — 10 गुना वृद्धि!)

    विकल्प 3 — दोनों:

    • कोर्ट चाहे तो कारावास और जुर्माना दोनों एक साथ दे सकती है

    विकल्प 4 — Community Service (नया!):

    • BNS ने पहली बार Community Service को सजा के विकल्प के रूप में जोड़ा है
    • यह एक progressive reform है जो rehabilitation पर focus करता है

    115 2 BNS in Hindi Saja Summary:

    सजा का प्रकार अधिकतम सीमा
    कारावास 1 वर्ष
    जुर्माना ₹10,000
    Community Service कोर्ट के विवेक पर

    115(2) BNS vs IPC — तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Table)

    बहुत से लोग खोजते हैं — “115 2 BNS in Hindi IPC” — यानी पुराने और नए कानून में क्या अंतर है। यहाँ एक comprehensive table है:

    विषय IPC (पुराना) BNS 2023 (नया)
    परिभाषा धारा Section 321 IPC Section 115(1) BNS
    सजा धारा Section 323 IPC Section 115(2) BNS
    कारावास 1 वर्ष तक 1 वर्ष तक
    जुर्माना ₹1,000 तक ₹10,000 तक
    Community Service नहीं हाँ
    Exception धारा Section 334 IPC Section 122(1) BNS
    जमानत Bailable Bailable
    Compoundable हाँ हाँ
    Chapter XVI — Human Body VI — Human Body

    निष्कर्ष: Structure वही है, fine 10 गुना बढ़ गया, और Community Service का नया विकल्प जोड़ा गया। Section 115(2) BNS in Hindi को पुराने IPC 323 का upgraded version समझिए।

    किन परिस्थितियों में यह धारा लगती है? — Expert Analysis

    Section 115 2 BNS in Hindi in IPC Section के बारे में experts कहते हैं कि यह अपराध भारत में सबसे ज्यादा दर्ज होने वाले अपराधों में से एक है। इसके पीछे कारण हैं:

    सबसे सामान्य situations जहाँ यह धारा लगती है:

    1. पड़ोसी विवाद — जमीन की सीमा, पानी, पार्किंग को लेकर झगड़ा
    2. Road Rage — ट्रैफिक में गुस्से में हाथापाई
    3. घरेलू विवाद — परिवार के भीतर के झगड़े (जो Domestic Violence Act से अलग category में हों)
    4. दुकान/बाजार विवाद — खरीद-बिक्री में झगड़ा
    5. Office/Workplace — कार्यस्थल पर शारीरिक टकराव
    6. सार्वजनिक स्थान — भीड़ में धक्कामुक्की

    Expert Insight — अधिवक्ता राज कुमार (Criminal Law Specialist): “BNS Section 115(2) वह धारा है जो सबसे पहले और सबसे आसानी से लगाई जाती है। लेकिन इसके साथ यह भी सच है कि यह सबसे ज्यादा settle होने वाला मामला भी है। अगर दोनों पक्ष बात करें तो 90% मामले कोर्ट से बाहर सुलझ जाते हैं।

    “Hurt” की परिभाषा — क्या-क्या इसमें शामिल है?

    BNS Section 2(16) के अनुसार “Hurt” में शामिल हैं:

    • शारीरिक दर्द (Bodily Pain) — कोई भी दर्द, चाहे कितना भी हल्का हो
    • बीमारी (Disease) — जानबूझकर किसी को बीमारी में डालना
    • शारीरिक कमजोरी (Infirmity) — शरीर को अस्थायी रूप से कमजोर करना

    क्या Grievous Hurt से अलग है?

    बिल्कुल! 115(2) BNS minor hurt को cover करता है। Grievous Hurt (गंभीर चोट) के लिए Section 116 BNS है — जो IPC के पुराने Section 325 के बराबर है — और उसमें सजा बहुत कठोर होती है।

    Simple Hurt के उदाहरण:

    • थप्पड़
    • मुक्का
    • खरोंचना
    • धक्का देना जिससे चोट लगे
    • बाल खींचना

    यह Grievous Hurt नहीं है (जो Section 116 BNS में आती है):

    • हड्डी टूटना
    • आँख की रोशनी जाना
    • लंबे समय तक disability

    अगर आप पर 115(2) BNS लगी है — क्या करें?

    अगर आप पर Dhara 115 लगी है, तो घबराएं नहीं। यहाँ एक practical guide है:

    तुरंत करें:

    1. एक अनुभवी Criminal Lawyer से मिलें
    2. अपनी bail का arrangement करें (यह Bailable है)
    3. सभी गवाहों और सबूतों की जानकारी collect करें
    4. घटना का पूरा विवरण लिखकर रखें

    याद रखें:

    • Compoundable होने के कारण समझौते का विकल्प हमेशा मौजूद है
    • अगर Section 122 का Exception लागू होता है, तो सजा कम हो सकती है
    • Trial किसी भी Magistrate के सामने होगा — High Court नहीं जाना पड़ेगा

    BNS के बारे में कुछ रोचक तथ्य

    चलिए थोड़ा interesting हो जाते हैं — Section 115(2) BNS के बारे में कुछ facts जो शायद आप नहीं जानते:

    • 🏛️ BNS, 2023 को Presidential Assent 25 दिसंबर 2023 को मिली — यानी Christmas Day को!
    • 📅 यह 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ — IPC के पूरे 163 साल बाद
    • 💰 जुर्माने में 10 गुना वृद्धि — ₹1,000 से ₹10,000 — एक बड़ा deterrence message
    • 🌱 Community Service पहली बार सजा के विकल्प के रूप में — यह reform बहुत progressive है
    • 📊 Section 323 IPC (अब BNS 115) भारत में सबसे ज्यादा दर्ज होने वाले अपराधों में से एक था
    • ⚖️ यह Non-Cognizable है — मतलब Police बिना Magistrate Order के Investigate नहीं कर सकती

    Tamil, Marathi और अन्य भाषाओं में जानकारी

    अगर आप Tamil में जानना चाहते हैं — 115 2 BNS in Tamil — तो जानें कि यह धारा “தன்னிச்சையாக காயம் ஏற்படுத்துதல்” (voluntarily causing hurt) को cover करती है। इसकी सजा और प्रक्रिया पूरे भारत में एक समान है, चाहे आप किसी भी राज्य में हों।

    BNS एक central law है — यह सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होती है। चाहे आप उत्तर प्रदेश में हों, तमिलनाडु में, राजस्थान में, या केरल में — 115(2) BNS in Hindi वाली सजा और प्रक्रिया same रहेगी।

    Landmark Case References (Educational Purpose)

    Section 323 IPC (अब BNS 115(2)) के तहत कुछ महत्वपूर्ण judicial observations:

    • Mens Rea जरूरी है: Supreme Court ने बार-बार कहा है कि सिर्फ चोट लगना काफी नहीं — Intention या Knowledge साबित होनी चाहिए
    • Burden of Proof: Prosecution का दायित्व है कि वह Reasonable Doubt से परे prove करे
    • Compounding के मामले: अगर दोनों पक्ष genuinely सुलह कर लें, तो High Court Section 482 CrPC के तहत FIR Quash भी कर सकती है (Narinder Singh v. State of Punjab — Supreme Court)

    Note: पुराने IPC के तहत दिए गए judgments Section 115(2) BNS की interpretation में भी relevant माने जाते हैं क्योंकि दोनों का मूल उद्देश्य same है।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    तो दोस्तों, अब आप 115 2 BNS in Hindi के बारे में पूरी तरह enlightened हो चुके हैं! 🎉

    Recap करते हैं — Section 115(2) BNS वह धारा है जो जानबूझकर किसी को साधारण चोट पहुँचाने पर लागू होती है। यह IPC के पुराने Section 323 की जगह आई है, लेकिन जुर्माना 10 गुना बढ़ गया है और Community Service का नया विकल्प जुड़ गया है।

    यह एक Bailable, Compoundable, और Non-Cognizable अपराध है — मतलब जमानत का अधिकार है, समझौते का रास्ता है, और Police को Magistrate की अनुमति चाहिए।

    लेकिन याद रखिए — कानून की जानकारी होना अच्छा है, लेकिन “छोटी चोट” के नाम पर किसी को नुकसान पहुँचाना — चाहे 1 साल की सजा हो या 10 साल — इंसान के रूप में कभी सही नहीं।

    और पढ़ें:

    • THE BNS SECTION
    • 352 BNS in Hindi
    • 351(3) BNS in Hindi

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. 115(2) BNS in Hindi में क्या है?

    A: Section 115(2) BNS स्वेच्छा से उपहति कारित करने (Voluntarily Causing Hurt) की सजा का प्रावधान है। इसमें 1 साल तक कारावास या ₹10,000 तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

    Q2. 115 2 BNS Bailable है या Non-Bailable?

    A: 115 2 BNS Bailable है — यानी जमानतीय अपराध। आरोपी को जमानत का अधिकार है।

    Q3. पुराने IPC में 115(2) BNS का equivalent क्या था?

    A: 115 2 BNS in IPC के समकक्ष पुराना Section 323 IPC था। 1 जुलाई 2024 से BNS लागू होने के बाद सभी नए मामले Section 115(2) BNS के तहत दर्ज होते हैं।

    Q4. 115(2) BNS में सजा (Saja) कितनी है?

    A: 115 2 BNS Punishment — अधिकतम 1 साल कारावास, या ₹10,000 जुर्माना, या दोनों। Community Service का विकल्प भी नया जोड़ा गया है।

    Q5. क्या Section 115(2) BNS का मामला कोर्ट से बाहर settle हो सकता है?

    A: हाँ! यह Compoundable Offence है। कोर्ट की अनुमति से दोनों पक्ष समझौता कर सकते हैं।

    Q6. Dhara 115 BNS Cognizable है या Non-Cognizable?

    A: Dhara 115 BNS — Non-Cognizable (असंज्ञेय) है। Police बिना Magistrate के आदेश के जांच नहीं कर सकती।

    Q7. अगर कोई जानबूझकर मुझे थप्पड़ मारे, तो क्या Section 115(2) BNS लागू होगा?

    A: हाँ, अगर थप्पड़ जानबूझकर मारा गया हो और उससे दर्द हुआ हो — तो यह Section 115(2) BNS के अंतर्गत आता है।

    Q8. Section 115(2) BNS कब से लागू हुआ?

    A: यह 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ, जब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) 2023 ने IPC 1860 को replace किया।

    Q9. क्या यह धारा सिर्फ हिंदी भाषी राज्यों में लागू है?

    A: नहीं! BNS एक Central Law है। 115 2 BNS चाहे Tamil Nadu हो, Maharashtra हो, या Rajasthan — पूरे भारत में एक समान लागू होती है।

    Q10. Section 115(2) BNS में किस कोर्ट में सुनवाई होती है?

    A: किसी भी Magistrate के न्यायालय में। यह High Court या Sessions Court का मामला नहीं है।

    Explore more blogs at: Iconichonors.com

    115 2 Bns 115 2 Bns Bailable or Non Bailable 115 2 Bns Bailable or Not 115 2 Bns in Hindi 115 2 Bns in Hindi in Ipc Section 115 2 Bns in Hindi Ipc 115 2 Bns in Hindi Ipc Section 115 2 Bns in Hindi Punishment 115 2 Bns in Hindi Saja 115 2 Bns in Ipc 115 2 Bns in Ipc in Hindi 115 2 Bns in Tamil 115 2 Bns is Bailable or Not 115 2 Bns Punishment 115(2) Bns in Hindi 115(2) Bns in Hindi in Ipc 115(2) Bns in Hindi Ipc 115(2)bns in Hindi Bns 115 2 in Hindi Dhara 115 Section 115 2 Bns Section 115 2 Bns in Hindi Section 115(2) Bns in Hindi
    Shiv

    एक Legal Content Writer हैं, जो भारतीय कानून और कानूनी जागरूकता से जुड़े विषयों पर सरल, सटीक और रिसर्च-आधारित लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक भरोसेमंद कानूनी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

    Latest Post

    352 BNS: 5 Alarming Truths About Bail & Punishment

    ShivJuly 17, 2026

    Last Updated: July 17, 2026 So someone mentioned “352 BNS” to you — maybe a…

    106 BNS in Hindi: 7 ज़रूरी बातें जो हर किसी को पता होनी चाहिए

    July 16, 2026

    324 IPC in Hindi: सज़ा, जमानत की 6 सच्चाइयां जो जानना ज़रूरी है!

    July 15, 2026

    IPC 323 in Hindi : 6 ज़रूरी बातें जो हर किसी को पता होनी चाहिए

    July 14, 2026

    126(2) BNS: 5 Bold Truths About Wrongful Restraint

    July 13, 2026
    Recent Post

    352 BNS: 5 Alarming Truths About Bail & Punishment

    July 17, 2026

    106 BNS in Hindi: 7 ज़रूरी बातें जो हर किसी को पता होनी चाहिए

    July 16, 2026

    324 IPC in Hindi: सज़ा, जमानत की 6 सच्चाइयां जो जानना ज़रूरी है!

    July 15, 2026
    Most Popular

    IPC 323 in Hindi : 6 ज़रूरी बातें जो हर किसी को पता होनी चाहिए

    July 14, 2026

    126(2) BNS: 5 Bold Truths About Wrongful Restraint

    July 13, 2026

    190 Bns in Hindi: सजा, जमानत और कानून की पूरी जानकारी

    July 13, 2026
    © 2026 All Right Reserved By Thebnssection.com.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.