Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    THE BNS SECTION
    • Home
    • IPC
      • BNS
    • Crimes & Punishments
    • Law
    • Legal Sections
    • Article
    • Cases
    • Contact Us
    • About US
      • Privacy Policy
      • Terms & Conditions
    THE BNS SECTION
    Home - Legal Sections - 480 BNSS In Hindi: जमानत का नियम और अर्जी, सरल भाषा में
    Legal Sections

    480 BNSS In Hindi: जमानत का नियम और अर्जी, सरल भाषा में

    ShivBy ShivOctober 22, 2026
    480 BNSS In Hindi

    480 BNSS In Hindi का मतलब है भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 480, जो बताती है कि गैर-जमानती अपराध में पकड़े गए व्यक्ति को अदालत कब जमानत दे सकती है और कब नहीं।

    Table of Contents

    Toggle
    • एक नज़र में: धारा 480 के मुख्य तथ्य
    • 480 BNSS In Hindi क्या है? आसान शब्दों में
    • 480 BNSS In CrPC: पुरानी धारा 437 से तुलना
    • जमानती और गैर-जमानती अपराध में फर्क
    • कब जमानत नहीं मिल सकती? धारा 480(1) की दो रुकावटें
    • किन लोगों को खास राहत मिल सकती है?
    • 480 BNSS Regular Bail: असल में क्या होती है?
    • अदालत जमानत देते समय क्या-क्या देखती है?
    • शर्तें और 2026 में सुप्रीम कोर्ट का रुख: धारा 480(3)
    • Bail Application Under Section 480 BNSS कैसे लगाएं? 9 चरण
    • 480 BNSS Bail Application Format: एक आसान नमूना
    • ज़रूरी दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट
    • कौन सी अदालत में जाएं? मजिस्ट्रेट, सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट
    • आम लोग ये 6 गलतियां क्यों करते हैं?
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • Read More
    • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
      • 1. 480 BNSS In Hindi में धारा 480 किस बारे में है?
      • 2. 480 BNSS In CrPC किस धारा के बराबर है?
      • 3. क्या 480 BNSS In Hindi में जमानत मिलना पक्का है?
      • 4. 480 BNSS In Hindi Regular Bail और अग्रिम जमानत में क्या फर्क है?
      • 5. 480 BNSS In Hindi Bail Application कहां दाखिल होती है?
      • 6. क्या 480 BNSS In Hindi Bail Application Format तय है?
      • 7. 480 BNSS In Hindi में जमानत की शर्त तोड़ने पर क्या होगा?

    रात के दो बजे फोन बजता है। दूसरी तरफ से आवाज़ आती है, “भैया को पुलिस ले गई है।” घर में सब घबरा जाते हैं। कोई वकील का नंबर ढूंढ रहा है, कोई गूगल पर “जमानत कैसे मिलती है” टाइप कर रहा है।

    ऐसे वक्त में सबसे पहले जो सवाल दिमाग में आता है, वो यही है: “क्या भैया को आज ही छुड़ाया जा सकता है?” इसका जवाब काफी हद तक Section 480 BNSS In Hindi में छिपा है।

    एक नज़र में: धारा 480 के मुख्य तथ्य

    पहले ज़रूरी आंकड़े और तथ्य एक जगह देख लेते हैं, ताकि आगे की बात आसानी से समझ आए।

    विषय जानकारी
    कानून का नाम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023
    धारा संख्या 480
    धारा का विषय गैर-जमानती अपराध में जमानत कब ली जा सकती है
    पुरानी धारा (CrPC) धारा 437
    लागू होने की तारीख 1 जुलाई 2024
    जमानत का स्वभाव अदालत के विवेक पर, अधिकार के रूप में नहीं
    किसे लागू पुलिस थाना प्रभारी और हाईकोर्ट व सेशन कोर्ट के अलावा अन्य अदालतें
    उप-धाराओं की संख्या 7
    हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट की शक्ति धारा 483 BNSS में

    480 BNSS In Hindi क्या है? आसान शब्दों में

    कानून की किताबें अक्सर ऐसी भाषा में लिखी होती हैं कि पढ़ते-पढ़ते नींद आ जाए। तो चलिए इसे घर की भाषा में समझते हैं। जमानत का मतलब है, केस चलने तक आरोपी को जेल से बाहर रहने की छूट, इस भरोसे पर कि वह अदालत में हाज़िर होता रहेगा।

    अपराध दो तरह के होते हैं। कुछ हल्के अपराध, जिनमें जमानत हक की तरह मिलती है। कुछ गंभीर अपराध, जिनमें जमानत हक नहीं, बल्कि अदालत की मेहरबानी और समझदारी पर निर्भर करती है। इन गंभीर अपराधों के लिए ही बनी है Dhara 480 BNSS In Hindi।

    सवाल आसान जवाब
    धारा 480 किसके लिए है? गैर-जमानती अपराध के आरोपी के लिए
    जमानत मिलना पक्का है? नहीं, अदालत हालात देखकर तय करती है
    कौन फैसला करता है? मजिस्ट्रेट या संबंधित निचली अदालत
    क्या शर्तें लग सकती हैं? हां, अदालत शर्तें लगा सकती है
    क्या जमानत रद्द हो सकती है? हां, शर्त तोड़ने पर

    480 BNSS In CrPC: पुरानी धारा 437 से तुलना

    जिन लोगों को पुराना कानून याद है, उनके मन में सवाल उठता है कि क्या सब कुछ बदल गया? राहत की बात यह है कि ज़्यादातर मूल ढांचा वैसा ही है। जो धारा 437 CrPC में थी, वही काम अब BNSS की धारा 480 करती है। यानी 480 BNSS In CrPC की भाषा में कहें तो यह पुरानी धारा 437 का नया पता है।

    बिंदु CrPC की धारा 437 BNSS की धारा 480
    विषय गैर-जमानती अपराध में जमानत गैर-जमानती अपराध में जमानत
    मूल ढांचा विवेक पर आधारित लगभग वही
    अपराधों का संदर्भ IPC BNS
    60 दिन वाला नियम मौजूद मौजूद
    शर्तें लगाने की शक्ति मौजूद मौजूद
    लागू पुराने मामलों में 1 जुलाई 2024 के बाद के मामलों में

    जमानती और गैर-जमानती अपराध में फर्क

    धारा 480 को समझने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि जमानती और गैर-जमानती अपराध में क्या अंतर होता है। आम बोलचाल में लोग “जमानत मिल गई” कह देते हैं, पर कानून में दोनों रास्ते अलग हैं।

    हल्के अपराधों में जमानत हक की तरह मिलती है और यह काम धारा 478 BNSS के तहत होता है। गंभीर अपराधों में मामला Section 480 BNSS In Hindi के दायरे में पहुंचता है।

    पहलू जमानती अपराध गैर-जमानती अपराध
    जमानत अधिकार अदालत का विवेक
    संबंधित धारा धारा 478 BNSS धारा 480 BNSS
    कौन दे सकता है पुलिस या अदालत मुख्य रूप से अदालत
    इनकार हो सकता है? आमतौर पर नहीं हां
    अपराध का स्तर हल्का गंभीर

    कब जमानत नहीं मिल सकती? धारा 480(1) की दो रुकावटें

    Section 480 BNSS In Hindi में अब आती है वो बात, जो हर परिवार जानना चाहता है: कब जमानत नहीं मिल सकती? धारा 480(1) में दो बड़ी रुकावटें बताई गई हैं।

    पहली रुकावट यह है कि अगर यह मानने के लिए ठोस कारण हों कि आरोपी ने ऐसा अपराध किया है, जिसकी सज़ा मौत या उम्रकैद है, तो आमतौर पर मजिस्ट्रेट जमानत नहीं देता। दूसरी रुकावट पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी है। अगर आरोपी पहले गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया जा चुका है, तो जमानत मुश्किल हो जाती है।

    रुकावट क्या होता है आसान मतलब
    मौत या उम्रकैद वाला अपराध ठोस कारण हों तो जमानत नहीं बहुत गंभीर मामला
    पहले की गंभीर सज़ा कुछ हालात में जमानत नहीं बार-बार अपराध का रिकॉर्ड
    दो या अधिक पुरानी सज़ाएं कुछ मामलों में रोक आदतन अपराध की आशंका

    किन लोगों को खास राहत मिल सकती है?

    Dhara 480 BNSS In Hindi में कुछ लोगों के लिए नरमी का रास्ता रखा गया है। अगर आरोपी 16 साल से कम उम्र का है, महिला है, या बीमार और कमज़ोर है, तो अदालत ऊपर बताई गई रुकावट के बावजूद जमानत दे सकती है।

    इसके अलावा, अगर अदालत को कोई और खास कारण समझ आए, तो भी वह जमानत पर विचार कर सकती है। एक और बात: सिर्फ इसलिए जमानत से मना नहीं किया जा सकता कि गवाह को आरोपी की पहचान करनी बाकी है, बशर्ते आरोपी जांच में सहयोग करने को तैयार हो।

    श्रेणी राहत की संभावना ध्यान रखें
    16 साल से कम उम्र हां उम्र का प्रमाण साथ रखें
    महिला आरोपी हां अदालत फिर भी हालात देखेगी
    बीमार या कमज़ोर व्यक्ति हां मेडिकल रिपोर्ट लगाएं
    कोई खास कारण अदालत पर निर्भर कारण साफ और ठोस लिखें
    पहचान के लिए ज़रूरत अकेला कारण नहीं जांच में सहयोग दिखाएं

    480 BNSS Regular Bail: असल में क्या होती है?

    अब बात करते हैं उस शब्द की, जो वकीलों की ज़ुबान पर हर रोज़ आता है, यानी रेगुलर बेल। 480 BNSS Regular Bail वह जमानत है, जो गिरफ्तारी के बाद गैर-जमानती अपराध में मांगी जाती है। यानी आरोपी पुलिस हिरासत या जेल में है और बाहर आना चाहता है।

    इसे अग्रिम जमानत से मत मिलाइए। अग्रिम जमानत गिरफ्तारी से पहले मांगी जाती है, जबकि रेगुलर बेल गिरफ्तारी के बाद।

    प्रकार कब मांगी जाती है संबंधित धारा
    रेगुलर बेल गिरफ्तारी के बाद धारा 480 BNSS
    अग्रिम जमानत गिरफ्तारी से पहले धारा 482 BNSS
    डिफ़ॉल्ट जमानत समय पर चार्जशीट न आने पर धारा 187 BNSS
    हाईकोर्ट या सेशन कोर्ट की जमानत विशेष शक्तियों के तहत धारा 483 BNSS
    लंबे समय की हिरासत पर राहत आधी या एक-तिहाई सज़ा पूरी होने पर धारा 479 BNSS

    अदालत जमानत देते समय क्या-क्या देखती है?

    480 BNSS Regular Bail की सुनवाई में जज कुछ सीधे सवालों पर गौर करते हैं। क्या आरोपी भाग सकता है? क्या वह गवाहों को डरा सकता है? क्या वह सबूत बिगाड़ सकता है? अपराध कितना गंभीर है?

    अदालत का सवाल आरोपी की तरफ से क्या दिखाएं
    क्या आरोपी भागेगा? पक्का पता, परिवार, नौकरी या कारोबार
    क्या गवाहों को प्रभावित करेगा? गवाहों से दूरी का भरोसा
    क्या सबूत मिटाएगा? जांच पूरी होने या जब्ती हो चुकने का तथ्य
    अपराध कितना गंभीर है? आरोपों की प्रकृति और सज़ा की सीमा
    पहले का रिकॉर्ड कैसा है? साफ रिकॉर्ड का प्रमाण
    कितने दिन हिरासत में रहा? हिरासत की अवधि का हिसाब

    शर्तें और 2026 में सुप्रीम कोर्ट का रुख: धारा 480(3)

    जमानत मिलने का मतलब “आज़ादी की पूरी छूट” नहीं है। अदालत कुछ शर्तें लगाती है। जैसे बुलाए जाने पर हाज़िर होना, वैसा ही अपराध दोबारा न करना, गवाहों को धमकाने या सबूत बिगाड़ने से बचना।

    480 BNSS In Hindi में यहां एक ताज़ा अपडेट बहुत काम का है। अप्रैल 2026 के एक आदेश (Narayan बनाम मध्य प्रदेश राज्य) के बारे में कानूनी खबरों में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने धारा 480(3) की अनिवार्य शर्तों को लेकर स्थिति साफ की। रिपोर्टों के मुताबिक, ये शर्तें सात साल तक की सज़ा वाले अपराधों पर अपने-आप लागू नहीं होतीं।

    शर्त मतलब नियम तोड़ने पर क्या हो सकता है
    अदालत में हाज़िरी तारीख पर आना जमानत रद्द हो सकती है
    वैसा अपराध न दोहराना साफ आचरण जमानत रद्द हो सकती है
    गवाहों को न धमकाना निष्पक्ष सुनवाई सख्त कार्रवाई
    सबूत से छेड़छाड़ न करना जांच की सुरक्षा जमानत रद्द
    अन्य शर्तें न्याय के हित में अदालत के आदेश पर निर्भर

    Bail Application Under Section 480 BNSS कैसे लगाएं? 9 चरण

    अब काम की बात। जमानत की अर्जी किसी बड़े रहस्य जैसी नहीं है, बस क्रम से चलना होता है। Bail Application Under Section 480 BNSS लगाने की प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है।

    चरण क्या करें ध्यान रखें
    1 FIR की कॉपी लें धाराएं और तारीख ध्यान से पढ़ें
    2 अपराध की श्रेणी जांचें जमानती है या गैर-जमानती
    3 वकील चुनें आपराधिक मामलों का अनुभव देखें
    4 तथ्य और आधार तैयार करें सच्चाई और साफ भाषा रखें
    5 अर्जी का मसौदा बनवाएं सही अदालत का नाम लिखें
    6 दस्तावेज़ लगाएं पहचान, पता, मेडिकल कागज़ात
    7 अदालत में दाखिल करें नंबर और तारीख नोट करें
    8 सुनवाई में पेश हों सरकारी वकील का पक्ष सुनें
    9 आदेश के बाद बॉन्ड भरें जमानतदार और मुचलका तैयार रखें

    480 BNSS Bail Application Format: एक आसान नमूना

    अब वह चीज़, जिसके लिए ज़्यादातर लोग यह लेख खोलते हैं। नीचे 480 BNSS Bail Application Format का सामान्य ढांचा दिया है। यह सिर्फ समझने के लिए है। असली अर्जी वकील की सलाह से ही बनवाएं।

    भाग क्या लिखा जाता है
    अदालत का नाम माननीय न्यायालय, [शहर और अदालत का नाम]
    केस का नंबर जमानत अर्जी संख्या ____ वर्ष 2026
    पक्षकार [आवेदक का नाम] बनाम राज्य
    संबंधित धारा धारा 480 BNSS (पहले CrPC 437)
    FIR का ब्योरा FIR संख्या, थाना, तारीख, लगी हुई BNS धाराएं
    तथ्य घटना का संक्षिप्त और सच्चा विवरण
    जमानत के आधार झूठे फंसाए जाने की बात, सहयोग, साफ रिकॉर्ड, हिरासत की अवधि, बीमारी या परिवार की ज़िम्मेदारी
    प्रार्थना आवेदक को उचित शर्तों पर जमानत दी जाए
    अंत में तारीख, स्थान, आवेदक और वकील के हस्ताक्षर

    ज़रूरी दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट

    Dhara 480 BNSS In Hindi के तहत अर्जी जितनी पूरी होगी, सुनवाई उतनी सुचारु चलेगी। 480 BNSS Bail Application Format के साथ ये कागज़ात लगते हैं, और इनकी देरी अक्सर जमानत में सबसे बड़ी रुकावट बन जाती है।

    दस्तावेज़ क्यों चाहिए
    FIR की कॉपी केस की जानकारी
    आधार कार्ड या पहचान पत्र आरोपी की पहचान
    पते का प्रमाण भागने की आशंका कम दिखाने के लिए
    जमानतदार के कागज़ात बॉन्ड भरने के लिए
    मेडिकल रिपोर्ट बीमारी का आधार हो तो
    उम्र का प्रमाण नाबालिग या बुज़ुर्ग होने पर
    पिछले आदेश की कॉपी अगर पहले जमानत खारिज हुई हो
    वकालतनामा वकील को अधिकार देने के लिए

    कौन सी अदालत में जाएं? मजिस्ट्रेट, सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट

    यहां अक्सर गड़बड़ हो जाती है। 480 BNSS In Hindi के हिसाब से धारा 480 मुख्य रूप से उन मामलों में काम आती है, जो हाईकोर्ट या सेशन कोर्ट के अलावा अन्य अदालतों के सामने आते हैं। यानी आमतौर पर मजिस्ट्रेट स्तर पर। जिन मामलों में मजिस्ट्रेट जमानत नहीं दे सकता या अर्जी खारिज हो जाती है, वहां ऊपरी अदालतों की विशेष शक्तियां धारा 483 BNSS में दी गई हैं।

    अदालत कब जाएं संबंधित धारा
    मजिस्ट्रेट कोर्ट गैर-जमानती अपराध में पहली बार जमानत धारा 480
    सेशन कोर्ट मजिस्ट्रेट से मना होने पर या गंभीर मामलों में धारा 483
    हाईकोर्ट सेशन कोर्ट से राहत न मिलने पर धारा 483
    सुप्रीम कोर्ट कानून के बड़े सवाल या अंतिम राहत के लिए संविधान और कानून के तहत

    आम लोग ये 6 गलतियां क्यों करते हैं?

    480 BNSS In Hindi की बात करें तो एक बात साफ है: Bail Application Under Section 480 BNSS में ज़्यादातर अर्जियां कानून की कमी से नहीं, लापरवाही से कमज़ोर होती हैं।

    गलती नुकसान बचाव
    अधूरे कागज़ात सुनवाई टलती है चेकलिस्ट से मिलान करें
    गलत धाराओं का उल्लेख अर्जी कमज़ोर होती है FIR से हूबहू मिलाएं
    झूठ या अतिशयोक्ति भरोसा टूटता है सिर्फ सच लिखें
    जमानतदार का इंतज़ाम न करना रिहाई में देरी पहले से तैयारी रखें
    शर्तों को हल्के में लेना जमानत रद्द हो सकती है हर शर्त का पालन करें
    अनुभवहीन सलाह लेना समय और पैसा बर्बाद अनुभवी वकील से मिलें

    निष्कर्ष (Conclusion)

    480 BNSS In Hindi का सार यह है कि गैर-जमानती अपराधों में जमानत देना अदालत के विवेक पर निर्भर करता है। यह धारा पुरानी CrPC की धारा 437 के अनुरूप है। गंभीर अपराधों में जमानत मिलना कठिन हो सकता है, जबकि महिला, बीमार या 16 वर्ष से कम उम्र के आरोपी को कुछ परिस्थितियों में राहत मिल सकती है।

    अदालत जमानत पर शर्तें लगा सकती है और उनके उल्लंघन पर जमानत रद्द हो सकती है। 480 BNSS Regular Bail के लिए सही दस्तावेज़ों और कानूनी सलाह के साथ आवेदन तैयार करना ज़रूरी है।

    Read More

    • 61 2 BNS In Hindi
    • 109 1 BNS In Hindi

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

    1. 480 BNSS In Hindi में धारा 480 किस बारे में है?

    480 BNSS In Hindi गैर-जमानती अपराधों में जमानत देने के नियम बताती है।

    2. 480 BNSS In CrPC किस धारा के बराबर है?

    480 BNSS In Hindi पुरानी CrPC की धारा 437 के अनुरूप है।

    3. क्या 480 BNSS In Hindi में जमानत मिलना पक्का है?

    नहीं, 480 BNSS In Hindi के तहत जमानत अदालत के विवेक और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

    4. 480 BNSS In Hindi Regular Bail और अग्रिम जमानत में क्या फर्क है?

    480 BNSS In Hindi के तहत रेगुलर बेल गिरफ्तारी के बाद, जबकि अग्रिम जमानत गिरफ्तारी से पहले मांगी जाती है।

    5. 480 BNSS In Hindi Bail Application कहां दाखिल होती है?

    480 BNSS In Hindi के तहत जमानत आवेदन आमतौर पर सक्षम मजिस्ट्रेट अदालत में दाखिल किया जाता है।

    6. क्या 480 BNSS In Hindi Bail Application Format तय है?

    480 BNSS In Hindi के लिए एक समान अनिवार्य फॉर्म नहीं है; स्थानीय अदालत के नियम लागू होते हैं।

    7. 480 BNSS In Hindi में जमानत की शर्त तोड़ने पर क्या होगा?

    480 BNSS In Hindi के तहत जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर अदालत जमानत रद्द कर सकती है।

    480 BNSS Bail Application Format 480 BNSS In CrPC 480 BNSS Regular Bail Bail Application Under Section 480 BNSS Dhara 480 BNSS In Hindi Section 480 BNSS In Hindi
    Shiv

    एक Legal Content Writer हैं, जो भारतीय कानून और कानूनी जागरूकता से जुड़े विषयों पर सरल, सटीक और रिसर्च-आधारित लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक भरोसेमंद कानूनी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

    Latest Post

    Peace Bond Under Section 126 BNSS: Rules, Rights And Cases

    ShivOctober 29, 2026

    126 BNSS allows an Executive Magistrate to ask a person who is likely to disturb…

    194 BNSS In Hindi: अप्राकृतिक मृत्यु की जांच के 5 जरूरी नियम

    October 28, 2026

    223 BNSS In Hindi — जानें एकसाथ ट्रायल की पूरी कहानी

    October 27, 2026

    173 BNSS Explained: Zero FIR, E-FIR, and 3 Strict Police Deadlines

    October 26, 2026

    482 BNSS in Plain Words: Who Can Apply, Where to File and What Happens Next

    October 23, 2026
    Recent Post

    Peace Bond Under Section 126 BNSS: Rules, Rights And Cases

    October 29, 2026

    194 BNSS In Hindi: अप्राकृतिक मृत्यु की जांच के 5 जरूरी नियम

    October 28, 2026

    223 BNSS In Hindi — जानें एकसाथ ट्रायल की पूरी कहानी

    October 27, 2026
    Most Popular

    173 BNSS Explained: Zero FIR, E-FIR, and 3 Strict Police Deadlines

    October 26, 2026

    482 BNSS in Plain Words: Who Can Apply, Where to File and What Happens Next

    October 23, 2026

    What Is 528 BNSS? High Court’s Inherent Power Made Simple

    October 23, 2026
    © 2026 All Right Reserved By Thebnssection.com.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.