Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    THE BNS SECTION
    • Home
    • IPC
      • BNS
    • Crimes & Punishments
    • Law
    • Legal Sections
    • Article
    • Cases
    • Contact Us
    • About US
      • Privacy Policy
      • Terms & Conditions
    THE BNS SECTION
    Home - BNS - BNS 85 in Hindi : 5 ताकतवर बातें जो हर महिला को पता होनी चाहिए
    BNS

    BNS 85 in Hindi : 5 ताकतवर बातें जो हर महिला को पता होनी चाहिए

    ShivBy ShivJuly 6, 2026
    Bns 85 in Hindi

    मान लीजिए किसी ने आपसे कहा, “यार, उसके खिलाफ 498A लग गया है” — और आप सोच रहे हैं, “रुको, अब तो नया कानून आ गया है ना, फिर 498A कैसे?” बस यही कन्फ्यूजन आज हम दूर करेंगे।

    BNS 85 — यानी भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 — भारत के नए आपराधिक कानून व्यवस्था का एक ऐसा प्रावधान है जो पुराने IPC सेक्शन 498A की जगह ले चुका है। अगर आप BNS 85 in Hindi सर्च कर रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं। हम इस लेख में सब कुछ कवर करेंगे — BNS 85 क्या है, उसका दंड, BNS 85 बेलेबल है या नहीं, और IPC से तुलना भी।

    एक नज़र में — BNS 85 के मुख्य आंकड़े

    विवरण जानकारी
    धारा का नाम BNS धारा 85 — पति या पति के रिश्तेदार द्वारा महिला के साथ क्रूरता
    पुराना IPC समकक्ष धारा 498A IPC
    लागू होने की तारीख 1 जुलाई 2024
    अपराध की श्रेणी संज्ञेय (शर्तों के साथ — नीचे देखें)
    BNS 85 Bailable Or Not गैर-जमानती (Non-Bailable)
    समझौता योग्य स्थिति गैर-समझौता योग्य (Non-Compoundable)
    अधिकतम सज़ा 3 वर्ष तक कारावास + जुर्माना
    सुनवाई अदालत प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Magistrate of the First Class)
    क्रूरता की परिभाषा धारा 86, BNS
    FIR का प्रावधान धारा 173, BNSS

    नोट: यह तालिका केवल संदर्भ के लिए है। किसी भी कानूनी मामले के लिए योग्य वकील से सलाह लेना ज़रूरी है।

    Table of content

    Toggle
    • एक नज़र में — BNS 85 के मुख्य आंकड़े
    • BNS 85 क्या है? सरल भाषा में समझें
    • BNS 85 सेक्शन इन हिंदी — पूरा शब्दांकन
    • BNS सेक्शन 85 भारतीय न्याय संहिता — पृष्ठभूमि समझें
    • BNS 85 In IPC — पुराने कानून से तुलना
    • BNS 85 Bailable Or Not — पूरी सच्चाई
    • BNS 85 In Hindi Saja — सज़ा और जुर्माने का पूरा ढांचा
    • BNS 85 B — क्या यह अलग प्रावधान है?
    • संज्ञेय स्थिति और FIR प्रक्रिया — कहां और कैसे शिकायत करें
    • दुरुपयोग की चिंता और सुरक्षा उपाय
    • निष्कर्ष
    • Read More:
      • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
      • 1. BNS 85 क्या है?
      • 2. BNS 85 जमानती है या नहीं?
      • 3. BNS सेक्शन 85 की सज़ा क्या है?
      • 4. क्या BNS 85 और IPC 498A एक समान हैं?
      • 5. क्या BNS 85 मामले में तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है?
      • 6. क्या BNS 85 का दुरुपयोग हो सकता है?

    BNS 85 क्या है? सरल भाषा में समझें

    चलिए सीधी बात करते हैं। BNS 85 क्या है, इसका एक-लाइन जवाब है: यह वह धारा है जो किसी शादीशुदा महिला के साथ उसके पति या ससुराल वालों द्वारा की गई क्रूरता को अपराध मानती है।

    1 जुलाई 2024 से भारत में IPC, CrPC और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह क्रमशः भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू हो गए। इस बदलाव में पुरानी धारा 498A IPC का मूल टेक्स्ट लगभग हूबहू BNS की धारा 85 में डाल दिया गया, और क्रूरता की परिभाषा को अलग धारा 86 में रखा गया। यानी BNS 85 in Hindi को समझने का सबसे आसान तरीका यही है — “498A अब 85 है, नाम नया, कानून वही।”

    पहलू विवरण
    कौन आरोपी हो सकता है महिला का पति या पति का कोई भी रिश्तेदार
    कौन शिकायतकर्ता हो सकती है पीड़ित विवाहित महिला
    अपराध कहाँ लागू होता है विवाहित महिला के साथ हुई क्रूरता के मामलों में
    कानून का उद्देश्य घरेलू और वैवाहिक क्रूरता, दहेज उत्पीड़न से सुरक्षा
    BNS चैप्टर चैप्टर V — महिलाओं के विरुद्ध अपराध

    BNS 85 सेक्शन इन हिंदी — पूरा शब्दांकन

    अब बात करते हैं BNS 85 सेक्शन इन हिंदी की, यानी इसका वास्तविक कानूनी शब्दांकन क्या कहता है:

    “जो कोई, किसी महिला के पति या पति के रिश्तेदार होते हुए, उस महिला को क्रूरता का शिकार बनाता है, उसे तीन साल तक की अवधि के लिए कारावास से दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने का भी ज़िम्मेदार होगा।”

    सरल शब्दों में — अगर पति या उसके परिवार के सदस्य किसी पत्नी के साथ क्रूरता करते हैं, तो उन्हें जेल हो सकती है, और साथ में जुर्माना भी लग सकता है।

    अब सवाल यह आता है कि “क्रूरता” का मतलब क्या है? इसका जवाब BNS धारा 86 में दिया गया है, जो दो तरह की क्रूरता परिभाषित करती है:

    1. ऐसा जान-बूझकर किया गया व्यवहार जो महिला को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दे, या उसकी जान, अंग, या स्वास्थ्य (मानसिक या शारीरिक) को गंभीर खतरा पहुंचाए।
    2. ऐसी उत्पीड़न जो महिला या उसके रिश्तेदारों को कोई अवैध मांग (जैसे दहेज) पूरी करने के लिए मजबूर करे, या जो अवैध मांग पूरी न होने की वजह से की जाए।

    BNS सेक्शन 85 भारतीय न्याय संहिता — पृष्ठभूमि समझें

    चलिए थोड़ा पीछे चलते हैं। BNS सेक्शन 85 भारतीय न्याय संहिता का कॉन्सेप्ट नया नहीं है — इसकी जड़ें 1983 में जाती हैं, जब दहेज हत्याओं और वैवाहिक क्रूरता के बढ़ते मामलों को देखते हुए IPC में सेक्शन 498A जोड़ा गया था।

    फिर 2023 में, जब संसद ने पुराने आपराधिक कानूनों — IPC, CrPC, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम — को बदलकर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम बनाया, तो 498A का मूल विचार वही रहा, बस नया नंबर मिल गया: BNS 85। यह नया कोड 1 जुलाई 2024 से पूरे भारत में लागू हो गया।

    BNS सेक्शन 85 इंडिया के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान इसलिए है क्योंकि वैवाहिक विवाद और घरेलू क्रूरता के मामले भारत में काफी आम हैं, और यह धारा सीधे उन पीड़ितों को कानूनी सुरक्षा देती है।

    BNS 85 In IPC — पुराने कानून से तुलना

    BNS 85 In IPC सर्च करने वाले ज़्यादातर लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या इस नई धारा में कोई असली बदलाव आया है या सिर्फ नंबर बदला है। जवाब है — सामग्री लगभग पूरी तरह वही है, सिर्फ संरचना को दो धाराओं (85 और 86) में बाँटा गया है।

    तुलना का बिंदु IPC धारा 498A BNS धारा 85
    लागू होने का वर्ष 1983 1 जुलाई 2024
    मूल अपराध पति/रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता पति/रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (अपरिवर्तित)
    अधिकतम सज़ा 3 वर्ष + जुर्माना 3 वर्ष + जुर्माना (अपरिवर्तित)
    जमानती स्थिति गैर-जमानती गैर-जमानती (अपरिवर्तित)
    संज्ञेय स्थिति संज्ञेय (शर्तों सहित) संज्ञेय (शर्तों सहित, अपरिवर्तित)
    समझौता योग्य स्थिति गैर-समझौता योग्य गैर-समझौता योग्य (अपरिवर्तित)
    क्रूरता की परिभाषा उसी धारा के स्पष्टीकरण में अलग धारा 86 में
    सुनवाई अदालत प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (अपरिवर्तित)

    BNS 85 Bailable Or Not — पूरी सच्चाई

    BNS 85 Bailable Or Not — यह शायद सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल है। सीधा जवाब: BNS 85 गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध है। इसका मतलब है कि जमानत पाना आरोपी का स्वतः अधिकार नहीं है — यह पूरी तरह अदालत के विवेक पर निर्भर करता है।

    लेकिन गैर-जमानती होने का यह मतलब नहीं कि पुलिस बिना जांच के तुरंत गिरफ्तार कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) के फैसले में साफ कहा था कि धारा 498A (अब BNS 85) जैसे मामलों में पुलिस को यांत्रिक ढंग से गिरफ्तारी नहीं करनी चाहिए। यह सुरक्षा अब BNSS की धारा 35 में भी दर्ज है, जिसके तहत पुलिस को गिरफ्तारी से पहले एक तय चेकलिस्ट का पालन करना होता है।

    स्थिति क्या होता है
    जमानत का प्रकार नियमित ज़मानत (Regular Bail) या अग्रिम ज़मानत (Anticipatory Bail)
    ज़मानत कौन देता है सेशन कोर्ट या हाई कोर्ट (गंभीरता के अनुसार)
    अग्रिम ज़मानत का प्रावधान धारा 482, BNSS
    गिरफ्तारी से पहले सुरक्षा धारा 35, BNSS (अरनेश कुमार फैसले पर आधारित)
    झूठी FIR रद्द कराने का रास्ता धारा 528, BNSS (हाई कोर्ट की अंतर्निहित शक्ति)

    BNS 85 In Hindi Saja — सज़ा और जुर्माने का पूरा ढांचा

    BNS 85 In Hindi Saja को लेकर कन्फ्यूजन आम है, क्योंकि लोग सोचते हैं कि नए कानून में सज़ा बढ़ी होगी। लेकिन सच यह है कि सज़ा बिल्कुल IPC 498A जैसी ही रखी गई है।

    BNS 85 In Hindi Saja की संरचना:

    • कारावास, जो अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ सकता है
    • साथ में जुर्माना भी लगाया जा सकता है
    • अदालत मामले की गंभीरता, सबूत और परिस्थितियों को देखकर सज़ा तय करती है
    सज़ा का पहलू विवरण
    न्यूनतम सज़ा कानून में निर्धारित नहीं (अदालत के विवेक पर)
    अधिकतम सज़ा 3 वर्ष कारावास
    जुर्माना हां, अनिवार्य रूप से लगाया जा सकता है
    सज़ा का प्रकार कारावास + जुर्माना दोनों साथ में संभव
    समझौता (Compounding) अनुमति नहीं, सिवाय अदालत की विशेष इजाज़त से FIR रद्द होने के मामलों में

    BNS 85 B — क्या यह अलग प्रावधान है?

    कई लोग BNS 85 B भी सर्च करते हैं, यह सोचकर कि शायद यह कोई अलग उप-धारा है। लेकिन स्पष्टता के लिए बताते हैं — मौजूदा उपलब्ध कानूनी संसाधनों में धारा 85 के अंतर्गत कोई अलग “85(b)” उप-खंड आधिकारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है जो अलग से व्यापक रूप से प्रलेखित हो। ज़्यादातर कन्फ्यूजन क्रूरता की दो श्रेणियों — शारीरिक/मानसिक नुकसान और दहेज से संबंधित उत्पीड़न — को लेकर होता है, जो धारा 86 में परिभाषित की गई हैं, न कि धारा 85 के अंदर किसी उप-भाग में।

    अगर आपको अपने विशिष्ट मामले में “85(b)” जैसा कोई संदर्भ मिला है, तो सबसे अच्छा होगा कि आप अपने केस के दस्तावेज़ किसी योग्य वकील को दिखाएं, ताकि सटीक कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सके।

    संज्ञेय स्थिति और FIR प्रक्रिया — कहां और कैसे शिकायत करें

    BNS 85 एक संज्ञेय अपराध है, लेकिन यहां एक ज़रूरी शर्त समझनी चाहिए — यह अपराध तभी संज्ञेय माना जाता है जब जानकारी पुलिस को इनमें से किसी के ज़रिए मिले:

    • पीड़ित महिला स्वयं
    • उसका कोई रिश्तेदार (रक्त संबंध, विवाह या गोद लेने से जुड़ा)
    • अगर कोई रिश्तेदार उपलब्ध न हो, तो राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित कोई सरकारी अधिकारी

    इसका मतलब है कि कोई अनजान व्यक्ति या पड़ोसी सीधे इस धारा में FIR दर्ज नहीं करा सकता — शिकायत पीड़िता, उसके रिश्तेदार या अधिकृत अधिकारी के ज़रिए ही आनी चाहिए।

    चरण प्रक्रिया
    1. शिकायत कहां करें नज़दीकी पुलिस स्टेशन में, या ज़ीरो FIR किसी भी थाने में
    2. कानूनी आधार धारा 173, BNSS (पहले धारा 154 CrPC)
    3. अगर पुलिस मना कर दे धारा 223, BNSS के तहत मजिस्ट्रेट के पास सीधी शिकायत (पहले धारा 200 CrPC)
    4. ज़रूरी सबूत मेडिकल रिपोर्ट, फोटो, मैसेज/ईमेल, गवाह के बयान, दहेज मांग से जुड़े दस्तावेज़
    5. गिरफ्तारी से पहले धारा 35 BNSS के तहत पुलिस को चेकलिस्ट पूरी करनी होती है

    दुरुपयोग की चिंता और सुरक्षा उपाय

    BNS 85, जैसे पहले 498A था, एक ऐसा प्रावधान है जिस पर लगातार बहस होती रहती है। एक तरफ यह कानून महिलाओं को वास्तविक क्रूरता से सुरक्षा देता है, दूसरी तरफ अदालतों ने खुद माना है कि कुछ मामलों में इसका दुरुपयोग भी होता है।

    इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने राजेश शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2017) में फैमिली वेलफेयर कमेटी जैसे सुरक्षा उपाय सुझाए थे, हालांकि इनमें से कुछ दिशा-निर्देश बाद में सोशल एक्शन फोरम फॉर मैनुअल स्कैवेंजर्स बनाम भारत संघ (2018) के फैसले में संशोधित भी किए गए। हाल के वर्षों में भी सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर जांच एजेंसियों को इस धारा के सावधानीपूर्वक इस्तेमाल की याद दिलाता रहा है।

    सुरक्षा उपाय किसके लिए
    धारा 35, BNSS (चेकलिस्ट आधारित गिरफ्तारी) तुरंत/यांत्रिक गिरफ्तारी रोकने के लिए
    धारा 482, BNSS (अग्रिम ज़मानत) गिरफ्तारी से पहले सुरक्षा पाने के लिए
    धारा 528, BNSS (FIR रद्द करने की शक्ति) स्पष्ट रूप से झूठे या अस्पष्ट आरोपों के मामलों में
    विशिष्ट आरोप की मांग पूरे परिवार को बिना वजह घसीटे जाने से बचाने के लिए

    निष्कर्ष

    तो दोस्तों, अगर आप BNS 85 in Hindi समझना चाहते थे, तो अब स्पष्ट हो गया होगा — यह पुराने IPC सेक्शन 498A का ही नया वर्ज़न है, जो शादीशुदा महिला को उसके पति या ससुराल वालों द्वारा की गई क्रूरता से सुरक्षा देता है। BNS 85 गैर-जमानती, संज्ञेय, और गैर-समझौता योग्य अपराध है, जिसमें सज़ा 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।

    चाहे आप एक पीड़िता हैं जो अपने अधिकार समझना चाहती हैं, या कोई जो गलत केस से डर रहा है, सबसे महत्वपूर्ण चीज़ यही है कि आप सही जानकारी के साथ एक योग्य वकील से बात करें। कानून हमेशा परिस्थिति-विशिष्ट होता है, और सामान्य लेख कभी भी व्यक्तिगत कानूनी सलाह का विकल्प नहीं हो सकता।

    Read More:

    • 341 IPC in Hindi
    • 137(2) Bns in Hindi

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    1. BNS 85 क्या है?

    BNS 85 एक प्रावधान है जो पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा किसी महिला के साथ की गई क्रूरता को आपराधिक अपराध मानता है। यह पुराने IPC सेक्शन 498A का प्रतिस्थापन है।

    2. BNS 85 जमानती है या नहीं?

    नहीं, BNS 85 गैर-जमानती अपराध है। जमानत अदालत के विवेक पर निर्भर करती है।

    3. BNS सेक्शन 85 की सज़ा क्या है?

    सज़ा में 3 साल तक की जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।

    4. क्या BNS 85 और IPC 498A एक समान हैं?

    हां, दोनों की मूल सामग्री व्यावहारिक रूप से समान है। बस धारा संख्या बदली है और क्रूरता की परिभाषा अब धारा 86 में दी गई है।

    5. क्या BNS 85 मामले में तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है?

    नहीं, सुप्रीम कोर्ट के अरनेश कुमार फैसले के अनुसार, पुलिस को गिरफ्तारी से पहले एक चेकलिस्ट का पालन करना होता है।

    6. क्या BNS 85 का दुरुपयोग हो सकता है?

    अदालतों ने पहले भी कहा है कि कुछ मामलों में इसका दुरुपयोग होता है, इसी लिए फैमिली वेलफेयर कमेटियां जैसी सुरक्षा उपाय सुझाई गई हैं।

    Bns 85 Bns 85 B Bns 85 Bailable or Not Bns 85 Dhara Kya Hai Bns 85 Hindi Bns 85 in Hindi Bns 85 in Ipc Bns 85 Ipc in Hindi Bns 85 is Bailable or Not Bns 85 Kya Hai Bns 85 Punishment Bns 85 Section Bns 85 Section in Hindi Bns Section 85 Bharatiya Nyaya Sanhita Bns Section 85 Bharatiya Nyaya Sanhita Section 85 Bns Section 85 Cruelty by Husband or Relatives Bns Section 85 India Bns Section 85 Punishment
    Shiv

    एक Legal Content Writer हैं, जो भारतीय कानून और कानूनी जागरूकता से जुड़े विषयों पर सरल, सटीक और रिसर्च-आधारित लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक भरोसेमंद कानूनी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

    Latest Post

    Peace Bond Under Section 126 BNSS: Rules, Rights And Cases

    ShivOctober 29, 2026

    126 BNSS allows an Executive Magistrate to ask a person who is likely to disturb…

    194 BNSS In Hindi: अप्राकृतिक मृत्यु की जांच के 5 जरूरी नियम

    October 28, 2026

    223 BNSS In Hindi — जानें एकसाथ ट्रायल की पूरी कहानी

    October 27, 2026

    173 BNSS Explained: Zero FIR, E-FIR, and 3 Strict Police Deadlines

    October 26, 2026

    482 BNSS in Plain Words: Who Can Apply, Where to File and What Happens Next

    October 23, 2026
    Recent Post

    Peace Bond Under Section 126 BNSS: Rules, Rights And Cases

    October 29, 2026

    194 BNSS In Hindi: अप्राकृतिक मृत्यु की जांच के 5 जरूरी नियम

    October 28, 2026

    223 BNSS In Hindi — जानें एकसाथ ट्रायल की पूरी कहानी

    October 27, 2026
    Most Popular

    173 BNSS Explained: Zero FIR, E-FIR, and 3 Strict Police Deadlines

    October 26, 2026

    482 BNSS in Plain Words: Who Can Apply, Where to File and What Happens Next

    October 23, 2026

    What Is 528 BNSS? High Court’s Inherent Power Made Simple

    October 23, 2026
    © 2026 All Right Reserved By Thebnssection.com.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.