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    DPSP Article 36 to 51: 6 जरूरी बातें जो आपको पता होनी चाहिए

    ShivBy ShivJuly 25, 2026
    Dpsp Article 36 to 51

    अंतिम अपडेट: 20 जुलाई, 2026

    एक दिलचस्प संवैधानिक तथ्य से शुरुआत करते हैं — भारतीय संविधान का जो हिस्सा शायद रोज़मर्रा की सरकारी नीतियों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है — जैसे मुफ्त कानूनी सहायता, ग्राम पंचायतें, मिड-डे मील, पर्यावरण संरक्षण — वो अदालत में कानूनी तौर पर लागू करवाया भी नहीं जा सकता। यही वो दिलचस्प विरोधाभास है जो DPSP Article 36 to 51 के केंद्र में है, और एक बार जब आप समझ जाते हैं कि संविधान निर्माताओं ने इसे इस तरह क्यों बनाया, तो यह बात सच में समझ आने लगती है।

    चलिए इसे ठीक से समझते हैं — पूरी लिस्ट, वर्गीकरण, इतिहास, और आखिर क्यों संविधान का यह “गैर-लागू करने योग्य” हिस्सा आज भी भारतीय कानून को इतना प्रभावित करता है।

    Table of Contents

    Toggle
    • क्विक फैक्ट्स टेबल: DPSP एक नज़र में
    • DPSP आखिर है क्या?
    • Dpsp Taken From Which Country: आयरलैंड से जुड़ाव
    • एक्सपर्ट राय (Expert Insight)
    • Dpsp Article 36: “राज्य” की परिभाषा
    • Dpsp Article 36 to 51 List: पूरी सूची
    • DPSP का वर्गीकरण: तीन श्रेणियां
      • Socialist Principles in DPSP Article
      • गांधीवादी सिद्धांत (Gandhian Principles)
      • उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांत (Liberal-Intellectual Principles)
    • Dpsp Article 39: करीब से एक नज़र
    • Dpsp Article 45: शिक्षा की कहानी
    • Dpsp Article 38: सामाजिक व्यवस्था और कल्याण
    • DPSP का फंडामेंटल राइट्स से क्या संबंध है
    • Dpsp Article 36 to 51 Trick: याद रखने का आसान तरीका
    • Dpsp Article 36 to 51 UPSC: क्या असल में पूछा जाता है
    • आज भी DPSP क्यों मायने रखता है
    • हमारी समीक्षा (Our Review)
    • निष्कर्ष (Conclusion)
    • Read More:
    • अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
      • प्रश्न 1. DPSP का पूरा नाम क्या है?
      • प्रश्न 2. DPSP किस देश के संविधान से लिया गया है?
      • प्रश्न 3. क्या DPSP अदालत में लागू करवाए जा सकते हैं?
      • प्रश्न 4. DPSP का वर्गीकरण कैसे किया जाता है?
      • प्रश्न 5. DPSP का अनुच्छेद 45 अब किससे संबंधित है?
      • प्रश्न 6. DPSP और मौलिक अधिकारों का क्या संबंध है?

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है और यह कानूनी सलाह नहीं है। संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या समय के साथ न्यायिक फैसलों और संशोधनों के आधार पर बदल सकती है। किसी भी असली कानूनी या शैक्षणिक जरूरत के लिए, कृपया आधिकारिक कानूनी स्रोतों या किसी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

    क्विक फैक्ट्स टेबल: DPSP एक नज़र में

    गहराई में जाने से पहले, यह रही आपकी वन-ग्लांस चीट-शीट।

    श्रेणी जानकारी
    पूरा नाम राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy)
    Dpsp Full Form in Hindi राज्य के नीति निदेशक तत्व
    संविधान में स्थान भाग IV
    अनुच्छेद सीमा Dpsp Article 36 to 51
    Dpsp Taken From Which Country आयरलैंड (आयरलैंड का संविधान, 1937)
    दूसरी प्रेरणा स्पेनिश संविधान, भारत सरकार अधिनियम 1935
    क्या कानूनी रूप से लागू होता है? नहीं — गैर-वादयोग्य (non-justiciable)
    वर्गीकरण समाजवादी, गांधीवादी, उदारवादी-बौद्धिक
    अंबेडकर ने इसे क्या कहा संविधान की “नई विशेषता” (Novel Feature)
    प्रमुख संबंधित मामले केशवानंद भारती (1973), मिनर्वा मिल्स (1980)

    इस टेबल को बुकमार्क कर लीजिए — आगे बढ़ते हुए आपको बार-बार यहां लौटना पड़ सकता है।

    DPSP आखिर है क्या?

    चलिए सीधी बात से शुरू करते हैं। Dpsp of Indian Constitution का मतलब है राज्य के नीति निदेशक तत्व — भाग IV में दिए गए दिशा-निर्देशों का एक सेट, जो Dpsp Article 36 to 51 तक फैला हुआ है, और सरकार को यह बताता है कि नागरिकों की समग्र भलाई के लिए कानून और नीतियां कैसे बनाई जाएं। इन्हें हर आने वाली भारतीय सरकार को दी गई एक “टू-डू लिस्ट” की तरह समझिए — असमानता कम करना, मुफ्त कानूनी सहायता देना, पर्यावरण की रक्षा करना, ग्राम स्वशासन को बढ़ावा देना, और ऐसे ही दर्जनों सच में महत्वपूर्ण लक्ष्य।

    अब यहां एक बड़ी बात है, और यह वाकई अहम है: फंडामेंटल राइट्स (मौलिक अधिकार) के उलट, DPSP गैर-वादयोग्य (non-justiciable) हैं। आप अदालत में जाकर सरकार पर यह मुकदमा नहीं कर सकते कि उसने किसी नीति निदेशक तत्व को लागू नहीं किया। अनुच्छेद 37 इसे साफ तौर पर कहता है, और साथ ही यह भी जोर देता है कि ये सिद्धांत “देश के शासन में बुनियादी” हैं और कानून बनाते समय राज्य का यह कर्तव्य है कि इन सिद्धांतों को लागू करे। यह सच में एक दिलचस्प कानूनी विरोधाभास है — बेहद जरूरी, फिर भी पूरी तरह से गैर-लागू करने योग्य।

    Dpsp Taken From Which Country: आयरलैंड से जुड़ाव

    अगर आप कभी सोचते रहे हैं कि Dpsp Borrowed From किस देश के संविधान से लिया गया है, तो जवाब है आयरलैंड। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने यह विचार सीधे आयरलैंड के 1937 के संविधान से लिया, जो खुद स्पेनिश संविधान से प्रभावित था। आयरलैंड के अलावा, DPSP को भारत सरकार अधिनियम, 1935 में दिए गए “इंस्ट्रूमेंट ऑफ इंस्ट्रक्शंस” से भी आकार मिला, साथ ही भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दस्तावेजों जैसे नेहरू रिपोर्ट और कराची प्रस्ताव से भी प्रेरणा मिली।

    एक्सपर्ट राय (Expert Insight)

    संवैधानिक विशेषज्ञ अक्सर बताते हैं कि DPSP का विचार आयरलैंड से उधार लेना, संविधान सभा के सामने आई एक सच में मुश्किल समस्या का एक चतुर समाधान था: एक नए, संसाधन-सीमित आजाद देश को बड़े सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों के लिए कैसे प्रतिबद्ध किया जाए, बिना ऐसी कानूनी बाध्यताएं बनाए जिन्हें नई सरकार तुरंत पूरा नहीं कर पाती? इन सिद्धांतों को वादयोग्य के बजाय निदेशात्मक बनाकर, भारत कागज़ पर एक कल्याणकारी राज्य के विज़न के प्रति प्रतिबद्ध हो सका, और साथ ही सरकारों को उपलब्ध संसाधनों के आधार पर धीरे-धीरे इस दिशा में काम करने की व्यावहारिक लचीलापन भी मिला।

    Dpsp Article 36: “राज्य” की परिभाषा

    अब असल लिस्ट पर आते हैं। Dpsp Article 36 शुरुआत में यह स्पष्ट करता है कि “राज्य” का यहां वही अर्थ है जो भाग III (अनुच्छेद 12) में है — यानी भारत सरकार और संसद, राज्य सरकारें और विधानसभाएं, और भारतीय क्षेत्र के भीतर स्थानीय या अन्य प्राधिकरण।

    Dpsp Article 36 to 51 List: पूरी सूची

    यहां है पूरी Dpsp Article 36 to 51 List, साफ-साफ टेबल में, ताकि आपको इसे इकट्ठा करने के लिए दस अलग-अलग टैब खंगालने न पड़ें।

    अनुच्छेद विषय
    36 “राज्य” की परिभाषा
    37 सिद्धांतों का प्रयोग (गैर-वादयोग्य लेकिन शासन में बुनियादी)
    38 राज्य लोगों के कल्याण के लिए सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करेगा
    39 राज्य द्वारा पालन किए जाने वाले कुछ नीति सिद्धांत (समान वेतन, संसाधनों का वितरण, धन-संचय रोकना)
    39A समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता
    40 ग्राम पंचायतों का संगठन
    41 कुछ मामलों में काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार
    42 काम की न्यायसंगत और मानवीय स्थितियां और प्रसूति सहायता
    43 श्रमिकों के लिए निर्वाह-योग्य वेतन
    43A उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी
    43B सहकारी समितियों को बढ़ावा
    44 नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड)
    45 प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का प्रावधान (मूल रूप से 14 वर्ष तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा)
    46 अनुसूचित जाति, जनजाति और कमजोर वर्गों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा
    47 पोषण स्तर, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य बढ़ाने का राज्य का कर्तव्य
    48 कृषि और पशुपालन का संगठन
    48A पर्यावरण, वन और वन्यजीवों का संरक्षण और सुधार
    49 राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और स्थानों का संरक्षण
    50 न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना
    51 अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा

    यह रही पूरी Dpsp Articles की लिस्ट, 36 से लेकर 51 तक, एक ही साफ-सुथरे टेबल में।

    DPSP का वर्गीकरण: तीन श्रेणियां

    संविधान खुद इन सिद्धांतों को औपचारिक रूप से वर्गीकृत नहीं करता — यह कुछ ऐसा है जो संवैधानिक विद्वानों ने समय के साथ किया है, सिर्फ इन्हें पढ़ना और समझना आसान बनाने के लिए। तीन व्यापक रूप से स्वीकृत श्रेणियां हैं: समाजवादी सिद्धांत (Socialist Principles), गांधीवादी सिद्धांत (Gandhian Principles), और उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांत (Liberal-Intellectual Principles)।

    Socialist Principles in DPSP Article

    Socialist Principles in DPSP Article का समूह सामाजिक और आर्थिक न्याय, असमानता कम करने, और एक सच में कल्याणकारी राज्य बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसमें शामिल हैं:

    • अनुच्छेद 38 (लोगों के कल्याण के लिए सामाजिक व्यवस्था)
    • अनुच्छेद 39 (संसाधनों का न्यायसंगत वितरण, समान काम के लिए समान वेतन)
    • अनुच्छेद 39A (मुफ्त कानूनी सहायता)
    • अनुच्छेद 41 (काम, शिक्षा, सार्वजनिक सहायता का अधिकार)
    • अनुच्छेद 42 (मानवीय कार्य स्थितियां, प्रसूति सहायता)
    • अनुच्छेद 43 (निर्वाह-योग्य वेतन)
    • अनुच्छेद 47 (पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर को बढ़ाना)

    गांधीवादी सिद्धांत (Gandhian Principles)

    ये महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर, गांव-केंद्रित भारत के विज़न को दर्शाते हैं, जिसमें विकेंद्रीकरण और ग्रामीण उत्थान पर जोर है। प्रमुख गांधी-प्रेरित अनुच्छेद हैं:

    • अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का संगठन)
    • अनुच्छेद 43 (कुटीर उद्योगों को बढ़ावा)
    • अनुच्छेद 43B (सहकारी समितियों को बढ़ावा)
    • अनुच्छेद 46 (अनुसूचित जाति, जनजाति और कमजोर वर्गों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा)
    • अनुच्छेद 47 (नशीले पेय पदार्थों और हानिकारक दवाओं पर प्रतिबंध)
    • अनुच्छेद 48 (गोवध पर प्रतिबंध और पशुधन नस्लों में सुधार)

    उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांत (Liberal-Intellectual Principles)

    यह श्रेणी उदारवादी शासन के आदर्शों की ओर झुकती है — व्यक्तिगत स्वतंत्रता, संस्थागत अखंडता, और आधुनिक, आगे की सोच वाली नीति। इसमें शामिल हैं:

    • अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता)
    • अनुच्छेद 45 (प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा)
    • अनुच्छेद 48 (वैज्ञानिक तरीकों से कृषि और पशुपालन का आधुनिकीकरण)
    • अनुच्छेद 48A (पर्यावरण संरक्षण)
    • अनुच्छेद 49 (राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और स्थानों का संरक्षण)
    • अनुच्छेद 50 (न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना)
    • अनुच्छेद 51 (अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा)

    Dpsp Article 39: करीब से एक नज़र

    चूंकि यह सच में सबसे महत्वपूर्ण और अक्सर उद्धृत किए जाने वाले प्रावधानों में से एक है, Dpsp Article 39 पर अलग से बात करते हैं। यह राज्य द्वारा पालन किए जाने वाले कई खास नीति सिद्धांत बताता है, जिनमें शामिल है कि नागरिकों के पास पर्याप्त जीविका के साधन हों, भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण सामान्य हित में हो, आर्थिक व्यवस्था इस तरह से चले कि धन का संचय आम भलाई के खिलाफ न हो, और पुरुषों व महिलाओं को समान काम के लिए समान वेतन मिले। इस अनुच्छेद का दशकों से भारतीय आर्थिक नीति बहसों में बार-बार उल्लेख होता रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर धन के वितरण और समानता से जुड़ा है।

    Dpsp Article 45: शिक्षा की कहानी

    Dpsp Article 45 का विकास सच में जानने लायक है। यह मूल रूप से संविधान लागू होने के दस साल के भीतर 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता था। 2002 में 86वें संविधान संशोधन के बाद, इस अधिकार को अनुच्छेद 21-A के तहत एक मौलिक अधिकार का दर्जा दे दिया गया, और अनुच्छेद 45 को फिर से छह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पर केंद्रित कर दिया गया — एक सामान्य शैक्षणिक लक्ष्य से ज्यादा विशिष्ट, प्रारंभिक-बचपन प्रावधान की ओर एक सार्थक बदलाव।

    Dpsp Article 38: सामाजिक व्यवस्था और कल्याण

    Dpsp Article 38 राज्य को यह प्रतिबद्धता देता है कि वह राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं में न्याय — सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक — पर आधारित एक सामाजिक व्यवस्था सुरक्षित करके लोगों के कल्याण को बढ़ावा दे। 1978 में 44वें संशोधन के जरिए एक महत्वपूर्ण जोड़ हुआ, जिसने खंड (2) जोड़ा, जो खासतौर पर राज्य को आय, दर्जा, सुविधाओं और अवसरों में असमानताओं को कम करने का निर्देश देता है — सिर्फ व्यक्तियों के बीच ही नहीं, बल्कि विभिन्न समूहों और क्षेत्रों में भी।

    DPSP का फंडामेंटल राइट्स से क्या संबंध है

    भाग III (मौलिक अधिकार) और भाग IV (DPSP) के बीच का रिश्ता भारतीय संवैधानिक कानून के सबसे ज्यादा विवादित और बहस वाले पहलुओं में से एक रहा है। अदालतों ने अक्सर इन दोनों हिस्सों को “संविधान के रथ के दो पहिए” कहा है — दोनों जरूरी हैं, लेकिन जब टकराव होता है तो थोड़ी अलग दिशाओं में खींचते हैं।

    केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) और मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) जैसे ऐतिहासिक मामलों में, सुप्रीम कोर्ट ने इस तनाव को गहराई से सुलझाया, और आखिरकार “सामंजस्यपूर्ण निर्माण” (harmonious construction) के सिद्धांत पर पहुंचा — जहां भी संभव हो, अदालतें मौलिक अधिकारों और DPSP को साथ में मिलाकर व्याख्या करने की कोशिश करती हैं, बजाय इन्हें अपने आप विरोधी मानने के। हालांकि, जहां वाकई कोई असमाधानीय टकराव होता है, वहां आमतौर पर मौलिक अधिकार ही प्रबल होते हैं, क्योंकि वे सीधे लागू करने योग्य हैं और DPSP नहीं।

    Dpsp Article 36 to 51 Trick: याद रखने का आसान तरीका

    अगर आप परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और वर्गीकरण याद रखने के लिए एक सच्ची Dpsp Article 36 to 51 Trick ढूंढ रहे हैं, तो सीधे नंबर याद करने के बजाय इन्हें थीम के हिसाब से समूहित करने की कोशिश करें:

    • समाजवादी = निष्पक्षता और कल्याण (सोचिए: वेतन, कानूनी सहायता, काम की स्थितियां)
    • गांधीवादी = गांव और आत्मनिर्भरता (सोचिए: पंचायतें, कुटीर उद्योग, सहकारी समितियां)
    • उदारवादी-बौद्धिक = आधुनिक शासन (सोचिए: यूसीसी, पर्यावरण, न्यायपालिका पृथक्करण, अंतरराष्ट्रीय शांति)

    किस नंबर की कौन सी श्रेणी है यह रटने के बजाय, हर अनुच्छेद को उसके असल दुनिया के लक्ष्य से जोड़ना परीक्षा में याद रखने के लिए कहीं ज्यादा असरदार साबित होता है।

    Dpsp Article 36 to 51 UPSC: क्या असल में पूछा जाता है

    जो लोग खासतौर पर Dpsp Article 36 to 51 UPSC की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए परीक्षक आमतौर पर बार-बार इन कुछ अहम क्षेत्रों पर ध्यान देते हैं:

    • तीन-तरफा वर्गीकरण (समाजवादी, गांधीवादी, उदारवादी-बौद्धिक) और खास अनुच्छेदों को सही श्रेणी में रखना
    • इस विचार की आयरिश उत्पत्ति और उसका द्वितीयक स्पेनिश प्रभाव
    • DPSP (गैर-वादयोग्य) और मौलिक अधिकार (वादयोग्य) के बीच का फर्क
    • वे प्रमुख संवैधानिक संशोधन जिन्होंने 39A, 43A, 48A जैसे नए अनुच्छेद जोड़े
    • DPSP-मौलिक अधिकार संबंध पर ऐतिहासिक केस लॉ

    हर अनुच्छेद के पीछे की सोच और असल दुनिया के मकसद को समझना, सिर्फ रटने के बजाय, ऑब्जेक्टिव और डिस्क्रिप्टिव दोनों तरह के परीक्षा फॉर्मेट में सच में ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

    आज भी DPSP क्यों मायने रखता है

    यह सोचना जरूरी है कि संविधान का एक गैर-लागू करने योग्य हिस्सा आज भी दशकों बाद इतना ध्यान क्यों खींचता है। ईमानदार जवाब यह है कि DPSP ने चुपचाप भारतीय कानून और नीति के एक बड़े हिस्से को आकार दिया है — शिक्षा के अधिकार अधिनियम से लेकर, अनुच्छेद 48A से जुड़े पर्यावरण संरक्षण कानूनों तक, और अनुच्छेद 39, 42, 43 में निहित कई श्रम कल्याण कानूनों तक। अदालतें भी अस्पष्ट कानूनों की व्याख्या करते समय नियमित रूप से DPSP का हवाला देती हैं, भले ही इन्हें सीधे तौर पर लागू न किया जा सके।

    हमारी समीक्षा (Our Review)

    कई संवैधानिक कानून स्रोतों, UPSC तैयारी सामग्री, और प्रासंगिक सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की समीक्षा करने के बाद, DPSP Article 36 to 51 सच में भारतीय संविधान के सबसे सोच-समझकर बनाए गए हिस्सों में से एक लगता है — अपने सामाजिक विज़न में महत्वाकांक्षी, फिर भी अपने क्रियान्वयन में व्यावहारिक रूप से लचीला। वर्गीकरण प्रणाली, भले ही आधिकारिक न हो, यह समझने का एक सच में उपयोगी नजरिया देती है कि कैसे भारत के संवैधानिक निर्माताओं ने समाजवादी कल्याण लक्ष्यों, गांधीवादी ग्रामीण मूल्यों, और उदारवादी आधुनिक शासन सिद्धांतों को एक ही एकीकृत खंड में संतुलित किया।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    चाहे आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र हों, एक जिज्ञासु नागरिक हों जो सोचते हैं कि आपकी सरकार मुफ्त कानूनी सहायता या ग्राम पंचायतों की बात क्यों करती है, या बस कोई है जो देर रात विकिपीडिया खंगालते हुए इस विषय पर पहुंच गया — DPSP Article 36 to 51 आखिरकार कुछ सच में महत्वाकांक्षी चीज़ को दर्शाता है: एक ऐसे कल्याणकारी, सामाजिक रूप से न्यायसंगत भारत का खाका, जिसे संविधान के निर्माताओं ने उम्मीद की थी कि आने वाली पीढ़ियां, एक-एक नीति करके, बनाएंगी।

    पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद! उम्मीद है इससे आपको DPSP Article 36 to 51 की पूरी, ईमानदार और आसान जानकारी मिली होगी। हमारा पिछला ब्लॉग यहां देखें|

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    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

    प्रश्न 1. DPSP का पूरा नाम क्या है?

    DPSP का मतलब है Directive Principles of State Policy यानी राज्य के नीति निदेशक तत्व, जो भारतीय संविधान के भाग IV, अनुच्छेद 36 से 51 में दिए गए हैं।

    प्रश्न 2. DPSP किस देश के संविधान से लिया गया है?

    DPSP आयरलैंड के 1937 के संविधान से लिया गया है, जो खुद स्पेनिश संविधान से प्रभावित था।

    प्रश्न 3. क्या DPSP अदालत में लागू करवाए जा सकते हैं?

    नहीं, DPSP गैर-वादयोग्य हैं और इन्हें सीधे अदालत में लागू नहीं करवाया जा सकता, मौलिक अधिकारों के उलट।

    प्रश्न 4. DPSP का वर्गीकरण कैसे किया जाता है?

    इन्हें व्यापक रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जाता है: समाजवादी सिद्धांत, गांधीवादी सिद्धांत, और उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांत।

    प्रश्न 5. DPSP का अनुच्छेद 45 अब किससे संबंधित है?

    86वें संशोधन (2002) के बाद, जिसने शिक्षा को अनुच्छेद 21-A के तहत मौलिक अधिकार बनाया, अनुच्छेद 45 को छह साल से कम उम्र के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पर केंद्रित कर दिया गया।

    प्रश्न 6. DPSP और मौलिक अधिकारों का क्या संबंध है?

    अदालतें दोनों की व्याख्या “सामंजस्यपूर्ण निर्माण” के सिद्धांत के जरिए साथ में करने की कोशिश करती हैं, लेकिन सीधे, असमाधानीय टकराव की स्थिति में आमतौर पर मौलिक अधिकार ही प्रबल होते हैं।

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    Shiv

    एक Legal Content Writer हैं, जो भारतीय कानून और कानूनी जागरूकता से जुड़े विषयों पर सरल, सटीक और रिसर्च-आधारित लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक भरोसेमंद कानूनी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

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